थलापति विजय की तीन घंटे तीन मिनट की फिल्म जन नेता रिलीज हो गई है. 23 जुलाई को फिल्म को दुनियाभर में रिलीज किया गया है. इस फिल्म की रिलीज को लंबे समय से रोका गया था. ये पूरी तरह से एक मासी फिल्म है जिस तरह की फिल्मों के लिए विजय को पहचाना जाता है. फिल्म जैसे ही खत्म होती है तो पूरा माजरा समझ में आ जाता है कि इसकी रिलीज पर इतने लंबे समय से क्यों विवाद चल रहा था. खासकर तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले. आइए एक नजर डालते हैं उन 10 मुद्दों पर जिन्हें थलापति विजय ने ना सिर्फ छुए बल्कि फिल्म में मुखरता से भी नजर आए.
1. भ्रष्टाचार से हाहाकार
फिल्म में भ्रष्टाचार की मिसाल के तौर पर प्रमुखता से आते हैं प्रकाश राज. किस तरह से राजनीति के नाम पर जनता को ठगा जाता है और भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जाता है, उसके वो प्रतीक हैं.
2. जहरीली शराब से मौतें
अकसर नकली शराब से लोगों की मौत की खबरें आती है. फिल्म में जब थलापति विजय इंस्पेक्टर होते हैं तो वो जहरीली शराब पर लगाम कसने की कोशिश करते हैं और कामयाब भी होते हैं.
3. जन आंदोलन का आह्वान
थलापति विजय की इस फिल्म में जन आंदोलन को कई जगह देखा जा सकता है. हालांकि अधिकतर मामलों में वे सफल होते नजर नहीं आते हैं, लेकिन दिखाया गया है कि अनशन पर बैठने की बजाय कुछ सॉलिड करने की जरूरत है.
4. पाकिस्तान और आतंक
पाकिस्तान और आतंक तो इंडियन फिल्मों का अहम हिस्सा हैं. ऐसे में जन नेता (जन नायगन) कैसे अछूती रहती. थलापति विजय की फिल्म में इस टॉपिक को भी टच किया गया है.
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5. आतंकी हमले
बॉबी देओल आतंकी हमले को अंजाम देते हैं. इस विषय को भी इस फिल्म में दिखाया गया है. भारत में अकसर इस तरह के हमले देखे जाते रहे हैं.
6. महिला सुरक्षा का सबक
ममता बैजू और थलापित की जो पूरी कहानी है, उसकी आवाज यही है कि महिलाएं पुरुषों से किन्हीं मायनों में कम नहीं हैं. ये बात बार-बार साबित भी होती है.
7. गुड टच, बैड टच
ये बच्चों के लिए एक बेहद जरूरी सबक है जिसे थलापति ने जन नेता में बखूबी दिया है. जिस तरह से इस सीन को पिरोया गया है, वो काबिलेतारीफ है.
8. एआई वर्सेज ह्यूमन
अब एआई जिस तरह से इंसानों की जिंदगी में दखल दे रहा है और युद्ध में भी इसका भरपूर इस्तेमाल हो रहा है. इसे भी जन नेता के अंत में बखूबी देखा जा सकता है. ड्रोन और रोबो आर्मी भी फिल्म में नजर आती है.
9. जरूरतमंदों के मसीहा
थलापति फिल्म में जरूरतमंदों के मसीहा के तौर पर दिखे हैं. कोई भी मुद्दा, उस पर वह आगे आते हैं और लोगों को संदेश देते हुए उसे हल कर जाते हैं. अब विजय की आखिरी फिल्म है तो ऐसे में ये करना तो बनाती ही था.
10. चुनाव और थलापति
अब जब फिल्म का अंत होता है तो इसमें चुनाव भी आते हैं, थलापति भी आते हैं और इशारा कर जाते हैं कि जब फिल्म बनी और जब रिलीज, उसके बीच हालात में कितना अंतर आ चुका है.
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