भारतीय सिनेमा की बात की जाए तो इसमें कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष के दम पर इतिहास रचा है. संघर्ष से सफलता तक के इस सफर में कई ऐसे नाम भी हैं, जिन्होंने सिर्फ सुपरस्टार बनने तक का ही नहीं बल्कि अपनी एक्टिंग के लिए एक मिसाल भी बने हैं. आज हम आपको तमिल के एक ऐसे ही कलाकार के बारे में बताएंगे जिन्होंने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने अभिनय का सिक्का जमाया.
हम बात कर रहे हैं तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता शिवाजी गणेशन, जिन्हें 'नदिगर थिलागम' (अभिनेताओं का गौरव) कहा जाता है. एक समय पर उनका स्टारडम इतना ज्यादा था कि उनके सामने कोई भी टिक नहीं पाता था. अपने करियर में गणेशन ने लगभग 300 फिल्मों में लीड रोल प्ले किया और अपने हर किरदार से लोगों के दिलों में उतर गए.
7 साल की उम्र से शुरू किया था काम
शिवाजी गणेशन का जन्म 1 अक्टूबर 1928 को तमिलनाडु के तंजावुर जिले में हुआ था. उनका पूरा नाम विल्लुपुरम चिन्नैया पिल्लै गणेशमूर्ति था. परिवार की फाइनेंसियल कंडीशन अच्छी नहीं थी, जिस वजह से उन्हे महज 7 साल की उम्र में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी. बचपन से ही एक्टिंग में इंट्रेस्ट रखने वाले गणेशन थिएटर से जुड़ गए और यहीं से उनके अभिनय के सफर की शुरुआत हुई.
ऐसे मिला 'शिवाजी' नाम

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ऐसा माना जाता है कि साल 1946 में उन्होंने एक नाटक में छत्रपति शिवाजी महाराज का रोल प्ले किया था. इस नाटक में उनकी एक्टिंग को लोगों ने इतना ज्यादा पसंद किया कि द्रविड़ कड़गम के संस्थापक ई. वी. रामासामी 'पेरियार' ने उन्हें 'शिवाजी' नाम दे दिया. जिसके बाद से वी.सी. गणेशन हमेशा के लिए शिवाजी गणेशन के नाम से फेमस हो गए.
पहली ही फिल्म से बन गए स्टार

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गणेशन ने कई सालों तक थिएटर में ही काम किया, इसके बाद 1952 में उन्होंने बड़े पर्दे पर फिल्म 'पराशक्ति' से कदम रखा. उनकी ये पहली ही फिल्म हिट हो गई. उनकी एक्टिंग की बहुत तारीफ हुई. ऐसा कहा जाता है कि यह फिल्म करीब 175 दिनों तक सिनेमाघरों में चली, जिसने उन्हें रातोंरात स्टार बना दिया.
300 फिल्मों में किए यादगार रोल

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ऐसा माना जाता है कि शिवाजी गणेशन ने अपने करियर में 300 फिल्मों में काम किया और लगभग हर फिल्म में वो लीड रोल में नजर आए. उन्होंने फैमिली ड्रामा, रोमांस, कॉमेडी, ऐतिहासिक, पौराणिक, एक्शन और क्राइम-थ्रिलर जैसी लगभग हर तरह की फिल्म में एक्टिंग की. उन्होंने कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया जिसमें फिल्म दैवा मगन उनके करियर की सबसे बेस्ट फिल्मों मे से एक रही. ऑस्कर के बेस्ट फॉरेन लैंग्वेज फिल्म पुरस्कार के लिए भारत की ओर से भेजी जाने वाली पहली तमिल फिल्म थी. इसके साथ ही उन्होंने साल 1964 में आई फिल्म 'नवरात्रि' में उन्होंने 9 अलग-अलग किरदार निभाकर एक नया रिकॉर्ड कायम किया.
दक्षिण भारत के मार्लन ब्रैंडो, देश-विदेश में मिला सम्मान

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शिवाजी गणेशन ने अपनी एक्टिंग का जलवा सिर्फ भारत में ही नहीं बिखेरा बल्कि उनके अभिनय का डंका विदेशों तक भी बजा. अमेरिकी न्यूज पेपर 'लॉस एंजिल्स टाइम्स' ने उन्हें 'दक्षिण भारत का मार्लन ब्रैंडो' कहा था.
गणेशन को उनके अभिनय के लिए सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी सम्मानित किया गया. साल 1960 में फिल्म 'वीरपांडिया कट्टाबोम्मन' के लिए मिस्र में आयोजित Afro-Asian Film Festival में उन्हें बेस्ट एक्टर का सम्मान मिला. इसके साथ ही वो इंटरनेशनल लेवल पर अवॉर्ड जीतने वाले पहले इंडियन एक्टर्स में शामिल हो गए.
इसके अलावा उन्हें पद्म श्री (1966), पद्म भूषण (1984) और भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1996) से भी सम्मानित किया गया. फ्रांस सरकार ने ( 1995) में उनको Chevalier National Order of the Legion of Honour सम्मान से भी नवाजा था. इसके अलावा उनके खाते में 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ और 3 तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड भी अपने नाम किए हैं.
राजनीति से भी जुड़े
अभिनय के अलावा गणेशन ने राजनीति से भी जुड़े रहे, लेकिन उनको आज तक उनकी एक्टिंग के लिए ही जाना जाता है. 21 जुलाई 2001 को 72 साल की उम्र में चेन्नई के अपोलो अस्पताल में उनका निधन हो गया.
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