दोस्ती पर बॉलीवुड में न जाने कितने गाने बने, लेकिन कुछ गाने ऐसे होते हैं जो हर दौर में लोगों की पहली पसंद बने रहते हैं. स्कूल की फेयरवेल पार्टी हो, कॉलेज का आखिरी दिन, दोस्तों की पार्टी हो या किसी पुराने यार से मुलाकात, एक गाना आज भी सबसे पहले याद आता है. ये गाना है साल 1980 में रिलीज हुई फिल्म दोस्ताना का एक सुपरहिट सॉन्ग, जो 45 साल बाद भी दोस्ती की पहचान बना हुआ है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें उस दौर के दो सबसे बड़े स्टार और दो सबसे बड़े गायक एक साथ नजर और सुनाई दिए.
जब पर्दे के दो सबसे बड़े स्टार बने जिगरी दोस्त
फिल्म दोस्ताना में अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा लीड रोल में थे. उस समय दोनों का नाम बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में लिया जाता था. दोनों लगातार हिट फिल्में दे रहे थे और अक्सर उनकी प्रोफेशनल राइवलरी की चर्चा भी होती रहती थी. माना जाता था कि दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े कॉम्पिटिटर हैं. लेकिन पर्दे पर तस्वीर बिल्कुल अलग थी.
फिल्म में दोनों ऐसे दोस्तों के रोल में दिखे जो हर मुश्किल में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं. उनकी यही बॉन्डिंग दर्शकों को इतनी पसंद आई कि फिल्म का दोस्ती वाला गाना सीधे लोगों के दिल में उतर गया. गाने के बोल हैं बने चाहें दुश्मन जमाना हमारा, सलामत रहे दोस्ताना हमारा. आज भी जब दोस्ती पर बॉलीवुड के सबसे यादगार गानों की बात होती है तो ये गाना सबसे पहले याद आता है.
रफी और किशोर ने मिलकर रच दिया इतिहास
इस गाने को और भी खास बनाती है इसकी आवाज. इसे मोहम्मद रफी और किशोर कुमार ने मिलकर गाया था. उस दौर में दोनों हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े प्लेबैक सिंगर थे. फैंस अक्सर इस बात पर बहस करते थे कि दोनों में बेहतर कौन है. इत्तेफाक देखिए जैसी राइवलरी दोनों हीरोज में थी. वैसा ही हेल्दी कॉम्पिटीशन रफी और किशोर कुमार में भी रहा. दिलचस्प बात ये है कि इस गाने में चारों दिग्गज ने शानदार काम किया और चारों ही यादगार हो गए, और उनकी वजह से ये गाना भी बेमिसाल बन गया. गीतकार आनंद बख्शी के आसान लेकिन दिल छू लेने वाले बोल और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का शानदार संगीत इस गाने की एक और सबसे बड़ी ताकत बना.
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