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24 भाई-बहनों में एक थे जीवन, पर्दे पर बने खूंखार विलेन तो 61 बार निभाया नारद मुनि का किरदार, असल जिंदगी में झेले कई दुख

24 भाई-बहनों वाले परिवार में जन्मे इस अभिनेता ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया था, लेकिन सपनों का साथ नहीं छोड़ा. जेब में सिर्फ 26 रुपये लेकर मुंबई पहुंचे इस कलाकार ने संघर्ष के दम पर हिंदी सिनेमा में ऐसी पहचान बनाई कि कभी नारद मुनि तो कभी खौफनाक विलेन बनकर करोड़ों दर्शकों के दिलों पर छा गए.

24 भाई-बहनों में एक थे जीवन, पर्दे पर बने खूंखार विलेन तो 61 बार निभाया नारद मुनि का किरदार, असल जिंदगी में झेले कई दुख
बॉलीवुड के सबसे बड़े खलनायक की कहानी

हिंदी सिनेमा में जब भी खलनायकों की बात होती है, तो कुछ चेहरे ऐसे याद आते हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के मन में डर पैदा कर दिया. जीवन उन्हीं कलाकारों में से एक थे. पर्दे पर कभी खूंखार विलेन बनकर उन्होंने हीरो की मुश्किलें बढ़ाईं, तो कभी नारद मुनि के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई. मगर उनकी असल जिंदगी की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं थी. 24 भाई-बहनों वाले परिवार में जन्मे जीवन ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया था. अभिनय के जुनून में उन्होंने घर छोड़ा और महज 26 रुपये लेकर मुंबई पहुंच गए. इसके बाद उन्होंने मेहनत के दम पर हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाई.

कश्मीर के अमीर परिवार में हुआ था जन्म

जीवन का असली नाम ओमकार नाथ धर था. उनका जन्म 24 अक्टूबर 1915 को कश्मीर में हुआ था. वह एक संपन्न कश्मीरी हिंदू परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके परिवार में 24 भाई-बहन थे और उनके दादा कश्मीर में गवर्नर के पद पर रह चुके थे. परिवार में सुख-सुविधाओं की कमी नहीं थी, लेकिन जीवन की जिंदगी में बचपन से ही दुखों ने जगह बना ली. बताया जाता है कि जन्म के समय ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था. जब वह महज तीन साल के थे, तब उनके पिता का भी निधन हो गया. इतनी छोटी उम्र में माता-पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई.

26 रुपये लेकर पहुंच गए मुंबई

उस दौर में फिल्मों में काम करना सम्मानजनक पेशा नहीं माना जाता था. जीवन के परिवार को भी उनका अभिनय की दुनिया में जाना पसंद नहीं था. लेकिन उन्हें फिल्मों से इतना लगाव था कि उन्होंने अपनी राह खुद चुनने का फैसला किया. महज 18 साल की उम्र में वह जेब में 26 रुपये लेकर मुंबई आ गए. यहां शुरुआत में उन्होंने मोहन सिन्हा के स्टूडियो में रिफ्लेक्टर बॉय के तौर पर काम किया. इसी दौरान उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला और उनका सफर आगे बढ़ने लगा.

कभी बने नारद मुनि, कभी खूंखार विलेन

जीवन ने अपने करियर में करीब 200 फिल्मों में काम किया. उनकी पहली फिल्म ‘फैशनेबल इंडिया' बताई जाती है. हालांकि, उन्हें सबसे ज्यादा पहचान पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाकर मिली. उन्होंने इस भूमिका को इतनी बार पर्दे पर उतारा कि उनके नाम के साथ नारद मुनि की पहचान जुड़ गई. अलग-अलग जगहों पर उनके इस किरदार को निभाने की संख्या 49 से लेकर 61 बार तक बताई जाती है.

वहीं, दूसरी तरफ जीवन ने खलनायक के रूप में भी खूब नाम कमाया. ‘अमर अकबर एंथनी', ‘धरम वीर', ‘लावारिस', ‘धर्मात्मा' और ‘हीर रांझा' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को याद किया जाता है. साल 1950 में आई ‘हर हर महादेव' भी उनके करियर की अहम फिल्मों में शामिल रही.

बेटे किरण कुमार ने बढ़ाई विरासत

जीवन की आखिरी फिल्म ‘इरादा' 1991 में उनके निधन के बाद रिलीज हुई थी. साल 1987 में 71 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. उनके बेटे किरण कुमार ने भी अभिनय की दुनिया में कदम रखा और अपनी अलग पहचान बनाई. जीवन भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन पर्दे पर निभाए उनके किरदार हिंदी सिनेमा के इतिहास का हिस्सा बने हुए हैं.

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