11 सितंबर को हिंदी ज़ी 5 पर रिलीज़ होने वाली घमासान (Ghamasaan) के साथ तिग्मांशु धूलिया (Tigmanshu Dhulia) एक बार फिर हिंदी हार्टलैंड से जुड़ी एक दमदार और गंभीर कहानी लेकर आ रहे हैं. प्रतीक गांधी और अरशद वारसी स्टारर यह फिल्म एक जुझारू आईपीएस अधिकारी और खौफनाक डकैत के बीच की टक्कर को दिखाती है. बुंदेलखंड के बीहड़ इलाकों की पृष्ठभूमि में बनी यह फिल्म एक्शन, ड्रामा, सत्ता और अस्तित्व की लड़ाई को एक साथ सामने लाती है. यहां जानिए 5 वजहें क्यों ‘घमासान' इस वीकेंड देखने के लिए एक दिलचस्प फिल्म हो सकती है
प्रतीक गांधी एक दमदार पुलिस ऑफिसर के किरदार में
प्रतीक गांधी आईपीएस अधिकारी अद्वैत सिंह की भूमिका निभा रहे हैं, जो एक ताकतवर अपराधी के सामने भी पीछे हटने को तैयार नहीं है. यह किरदार उन्हें एक ज्यादा गंभीर और एक्शन से भरपूर भूमिका में देखने का मौका देता है. उनका सफर एक ऐसी खतरनाक जंग के बीच से गुजरता है, जहां हर फैसला अपने साथ एक नई चुनौती लेकर आता है. न्याय की तलाश अद्वैत की कहानी का एक अहम हिस्सा है. मजबूत पुलिस किरदारों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘घमासान', प्रतीक गांधी का एक अलग अंदाज देखने का मौका देती है.
अरशद वारसी का डार्क और इंटेंस अवतार
अरशद वारसी अपनी कॉमिक इमेज से बिल्कुल अलग अंदाज में महाराज का किरदार निभा रहे हैं, जो एक खौफनाक और बेरहम डकैत है. अपने इलाके में उसका दबदबा है और उसके अगले कदम का अंदाजा लगाना आसान नहीं. उसकी मौजूदगी अद्वैत के लिए खतरा लगातार बढ़ाती रहती है और दोनों के बीच टकराव को और दिलचस्प बनाती है. अरशद वारसी को इतने गंभीर और डार्क किरदार में देखना फिल्म के बड़े आकर्षणों में से एक है. उनका किरदार फिल्म की कहानी में एक अलग तरह की तीव्रता जोड़ता है.
पुलिस और डकैत के बीच एक रोमांचक टक्कर
‘घमासान' के केंद्र में अद्वैत सिंह और महाराज के बीच की सीधी टक्कर है. शुरुआत में यह लड़ाई एक पुलिस अधिकारी और अपराधी के बीच नजर आती है, लेकिन धीरे-धीरे यह सत्ता, प्रभाव और अस्तित्व की एक बड़ी जंग में बदल जाती है. दोनों किरदार कानून के बिल्कुल अलग-अलग छोर पर खड़े हैं, लेकिन अपने मकसद को लेकर दोनों उतने ही दृढ़ हैं. यही टकराव कहानी को आगे बढ़ाता है और फिल्म में लगातार तनाव बनाए रखता है. अगर आपको दमदार राइवलरी और कैट-एंड-माउस कहानियां पसंद हैं, तो ‘घमासान' आपके लिए एक दिलचस्प वॉच हो सकती है.
हिंदी हार्टलैंड से जुड़ी कहानी
बुंदेलखंड के बीहड़ इलाकों की पृष्ठभूमि में बनी ‘घमासान' हिंदी हार्टलैंड के माहौल को कहानी का अहम हिस्सा बनाती है. धूल भरी सड़कें, बीहड़ और छोटे शहरों का माहौल फिल्म की दुनिया को एक अलग पहचान देते हैं. तिग्मांशु धूलिया अपनी कहानियों को उनके माहौल और जगह से जोड़ने के लिए जाने जाते हैं और ‘घमासान' में भी उनकी यही संवेदनशीलता नजर आती है. फिल्म की लोकेशन कहानी के संघर्ष को और वास्तविक बनाती है और इसे एक अलग विजुअल पहचान देती है.
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तिग्मांशु धूलिया की दमदार और ग्रिटी कहानी
तिग्मांशु धूलिया के काम को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘घमासान' एक ऐसी कहानी लेकर आती है, जिसमें जटिल किरदारों, सत्ता के संघर्ष और हिंदी हार्टलैंड की हकीकत को जगह दी गई है. उनकी कहानियां अक्सर ऐसे किरदारों पर फोकस करती हैं जो सही और गलत की सीधी सीमाओं के बीच नहीं बंधे होते. ‘घमासान' में भी क्राइम, राजनीति, एक्शन और इंसानी संघर्ष को एक ही कहानी में जोड़ा गया है. यही वजह है कि यह फिल्म सिर्फ एक आम पुलिस और डकैत की कहानी बनकर नहीं रह जाती, बल्कि अपने किरदारों और उनके संघर्षों को भी सामने लाती है. तिग्मांशु धूलिया का यह जमीनी अंदाज फिल्म को इस वीकेंड देखने की एक और वजह बनाता है.
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