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68 साल पुराना वो गाना, जिसमें हीरोइन ने समाज के सामने महिलाओं का दर्द कह दिया, लता की आवाज ने वैजयंतीमाला के डांस को बना दिया आंदोलन

1958 की फिल्म ‘साधना’ का ‘औरत ने जनम दिया मर्दों को’ ऐसा गीत था, जिसमें साहिर लुधियानवी ने महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर सवाल उठाए. लता मंगेशकर की आवाज और वैजयंतीमाला के अभिनय ने इस गीत को बेहद असरदार बना दिया.

68 साल पुराना वो गाना, जिसमें हीरोइन ने समाज के सामने महिलाओं का दर्द कह दिया, लता की आवाज ने वैजयंतीमाला के डांस को बना दिया आंदोलन
महिलाओं के हक़ की बात करता है वैजयंतीमाला का ये गाना

1958 में आई फिल्म ‘साधना' का गाना ‘औरत ने जनम दिया मर्दों को' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे असरदार गीतों में गिना जाता है. इस गाने में वैजयंतीमाला पर्दे पर नजर आईं और उनके लिए लता मंगेशकर ने आवाज दी. संगीत एन. दत्ता ने दिया और गीत साहिर लुधियानवी ने लिखा था. गाने में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव, शोषण और समाज के दोहरे रवैये पर सीधी बात की गई थी. यही वजह है कि यह सिर्फ फिल्म का गाना बनकर नहीं रहा. इसकी पंक्तियां आज भी लोगों को सोचने पर मजबूर करती हैं. वैजयंतीमाला ने भी इसे अपने सबसे खास गानों में बताया था. 

साहिर ने गाने में समाज को दिखाया आईना

‘औरत ने जनम दिया मर्दों को' के बोल उस समय के लिए बहुत बेबाक थे. साहिर लुधियानवी ने इस गाने में सवाल उठाया कि जिस औरत से पुरुष जन्म लेता है, उसी औरत के साथ समाज इतना भेदभाव क्यों करता है. गाने में महिलाओं को बाजार की वस्तु समझने, उनके साथ होने वाली हिंसा और उनके लिए बनाए गए अलग नियमों पर सवाल किया गया. साहिर ने सिर्फ महिलाओं की परेशानी नहीं बताई, बल्कि उस सोच पर भी चोट की, जो इन हालात को सामान्य मानती थी. यही वजह है कि बाद में इस गाने को साहिर के सबसे असरदार गीतों में शामिल किया गया. 

लता की आवाज और वैजयंतीमाला का अभिनय

गाने की एक बड़ी खासियत लता मंगेशकर की आवाज थी. उन्होंने जिस गंभीरता से साहिर के शब्दों को गाया, उससे गाने का असर और बढ़ गया. संगीतकार एन. दत्ता ने गीत को ऐसी धुन दी, जिसमें शब्द सबसे आगे रहे.  पर्दे पर वैजयंतीमाला ने इन शब्दों को अपने इमोशंस और डांस के जरिए सामने रखा. कई साल बाद एक इंटरव्यू में उन्होंने इस गाने को अपने दिल के सबसे करीब बताया. 

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उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति पर लता की आवाज ने शब्दों को जिस गहराई से पेश किया, वह बेजोड़ था. यही कारण है कि यह गाना सिर्फ एक डांस नंबर नहीं लगा. वैजयंतीमाला का अभिनय और लता की आवाज मिलकर महिलाओं की पीड़ा की आवाज बन गए.

वेश्या की कहानी थी ‘साधना'

‘साधना' सिर्फ इस गाने की वजह से खास नहीं थी. बी.आर. चोपड़ा की यह फिल्म समाज के एक मुश्किल विषय पर बनी थी. इसमें वैजयंतीमाला ने चंपा नाम की एक वेश्या का किरदार निभाया था, जबकि सुनील दत्त ने एक कॉलेज शिक्षक मोहन की भूमिका निभाई. कहानी चंपा और मोहन के रिश्ते के आसपास आगे बढ़ती है.  फिल्म में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या समाज किसी महिला को उसके पुराने जीवन के कारण हमेशा के लिए अलग कर सकता है. इसी वजह से ‘साधना' को उस दौर की सामाजिक मुद्दे पर बनी महत्वपूर्ण फिल्मों में गिना जाता है.

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फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी सफल रही. रिकॉर्ड के अनुसार ‘साधना' 1958 की पांचवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी और इसे ‘हिट' का दर्जा मिला था. फिल्म ने बी.आर. चोपड़ा के बैनर को भी मजबूत किया. करीब सात दशक बाद भी ‘औरत ने जनम दिया मर्दों को' की खासियत यही है कि यह गाना सिर्फ सुना नहीं जाता, बल्कि इसके शब्द सवाल खड़े करते हैं. साहिर के बेबाक बोल, लता की आवाज और वैजयंतीमाला का अभिनय मिलकर इसे हिंदी सिनेमा का ऐसा गीत बनाते हैं, जिसकी बात आज भी पुरानी नहीं लगती.

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