90s का दशक बॉलीवुड में मां के दर्द, करूणा और उसके प्यार को शानदार तरीके से सजा कर दिखाया जाता रहा है. इस दौरान हिंदी सिनेमा में बनने वाली अधिकतर फिल्में मां- बेटे के प्यार के आसपास घूमती रहती है. इस एहसास को दर्शकों को समझाने वह फिल्म की कहानियों में कोई न कोई ऐसा तराना फिल्मा देते थे तो बेहद यादगार बन जाता था.
जैसे अनुराग मूवी में नूतन अपने सात साल के बेटे को लोरी गाकर सुलाती तो वही फिल्म मुक्ति में लोरी सुनाकर बेटी के साथ खुशी से झूमते हुए शशि कपूर . जब हिंदी सिनेमा में यह एहसास हिट हुआ तो दूसरी फिल्म इंडस्ट्री जैसे भोजपुरी सिनेमा ने भी इसे समझकर पर्दे पर सजाने की कोशिश की और साल 1965 में 'भौजी' मूवी से हिंदी की लोकप्रिय लोरी 'चंदा मामा दूर के' को ममता के एहसास में पिरोकर दिखाने की कोशिश की .
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मां के एहसास के साथ देवर को लोरी गाकर सुलाती है भौजी
साल 1965 में रिलीज हुई भोजपुरी फिल्म भौजी में चंदा मामा दूर के को 'ऐ चंदा मामा आरे आवा पारे आवा' के बोल में ढालकर पर्दे पर फिल्माया गया है. जिसमें भौजी का किरदार निभा रही कुमकुम (जो फिल्म में भाभी का किरदार निभा रही है) अपने देवर को लोरी गाकर सुलात . जिसके बोल होते है "ऐ चंदा मामा आरे आवा, पारे आवा, नदिया किनारे आवा... सोना के कटोरी दूध भात ले ले आवा, बबुआ का मुआ में घुटुक". जिससे एक अलग भाषा में सुनना बेहद सुंदर लगता है.
यहां सुने लता मंगेशकर की आवाज में ये भोजपुरी लोरी गीत
लता मंगेशकर की अवाज से सजा चंदा मामा का लोरी गीत
एक क्लासिक भोजपुरी पारिवारिक और सामाजिक ड्रामा फिल्म है, जिसका जिसका निर्देशन कुंदन कुमार ने किया था. इस सदाबहार लोरी को सुर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी, जिसे चित्रगुप्त ने संगीतबद्ध किया था और इसके बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे. फिल्म में कुमकुम एक ममतामयी भाभी (भौजी) के रूप में अपने छोटे देवर को सुलाने और बहलाने के लिए इस गाने को गाती हैं.
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