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1966 का वो गाना जो आज भी नहीं हुआ पुराना, रेडियो की हुआ करता था शान, आशा भोसले ने अपनी आवाज से किया अमर

1966 की फिल्म मेरा साया का सुपरहिट गीत ‘झुमका गिरा रे’ आज भी लोगों की जुबान पर है. आशा भोसले की मधुर आवाज, साधना का अंदाज और तेजी बच्चन से जुड़ा दिलचस्प किस्सा इस गाने को हिंदी सिनेमा का कालजयी गीत बनाता है.

1966 का वो गाना जो आज भी नहीं हुआ पुराना, रेडियो की हुआ करता था शान, आशा भोसले ने अपनी आवाज से किया अमर
60 साल पुराना वो गाना जिसने झूमके को कर दिया था मशहूर
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हिंदी सिनेमा में 60 साल पहले एक फिल्म आई, जिसका नाम मेरा साया था. इस फिल्म में साधना, सुनील दत्त, के.एन. सिंह और प्रेम चोपड़ा जैसे कलाकार मुख्य भूमिका में थे. फिल्म रहस्य-रोमांच से भरपूर था. मेरा साया की कहानी उस वक्त काफी चर्चा में रही थी. इतना ही नहीं फिल्म के गाने भी काफी हिट हुए थे. उनमें से एक गाना है 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में...' ये सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा का ऐसा सदाबहार गीत है, जिसने दशकों से लोगों के दिलों पर राज किया है. फिल्म 10 जून 1966 में रिलीज हुई थी.

आशा भोसले की खनकती आवाज, साधना का चुलबुला अंदाज और मदन मोहन का मधुर संगीत ने 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में...' गाने को खास बनाया. दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की प्रेरणा तेजी बच्चन की एक बातचीत से मिली थी और इसकी लोकप्रियता ने बरेली को हमेशा के लिए 'झुमका सिटी' की पहचान दिला दी.

गाने की दिलचस्प प्रेरणा

राजा मेहदी अली खान को प्रेरणा अमिताभ बच्चन की माता तेजी बच्चन की बात से मिली. 1940 के दशक में बरेली में हरिवंश राय बच्चन से मुलाकात के बाद तेजी ने एक मौके पर कहा था-'मेरा झुमका तो बरेली के बाजार में ही गिर गया.' यही पंक्ति गाने का आधार बनी. गाने में 'फिर क्या हुआ?' वाली लाइन विनोद शर्मा ने कही थी, जो सालों तक रहस्य बनी रही. यह 1966 की बिनाका गीतमाला में चौथे स्थान पर रहा. रेडियो पर भी जमकर सुना जाता था. फिल्म के ज्यादातर गाने लता मंगेशकर ने गाए, लेकिन यह मस्तीभरा नंबर आशा भोसले के हिस्से में आया.

फिल्म का कास्ट और सफलता

फिल्म मेरा साया में सुनील दत्त ठाकुर राकेश सिंह के रूप में, साधना गीता और निशा के तौर पर, प्रेम चोपड़ा डाकू के रूप में और के.एन. सिंह अभियोजन वकील के रूप में नजर आए.फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और लगभग 4.5 करोड़ का कारोबार किया. यह मराठी फिल्म पाठलाग की रीमेक थी और राज खोसला-साधना की थ्रिलर का हिस्सा. आशा भोसले की खनकती आवाज ने 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में...' को कालजयी बना दिया.

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सांस्कृतिक प्रभाव और अमर पहचान

गाने की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि बरेली प्रशासन ने 14 फीट ऊंचा पीतल का झुमका स्थापित किया और चौराहे का नाम झुमका चौक रखा. यह गाना आज भी डांस और रीमिक्स में जिंदा है. आशा भोसले की आवाज ने इसे सिर्फ फिल्मी गाना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक प्रतीक बना दिया.

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