15 अगस्त आते ही देशभक्ति के कई गीत कानों में गूंजने लगते हैं, लेकिन कुछ गाने ऐसे हैं जो समय के साथ सिर्फ गीत नहीं रहते, बल्कि राष्ट्रीय भावनाओं का हिस्सा बन जाते हैं. ऐसा ही एक गीत है ‘मेरे देश की धरती', जो 1967 में रिलीज हुई मनोज कुमार की फिल्म उपकार का हिस्सा था. महेंद्र कपूर की बुलंद आवाज, गुलशन बावरा के शब्द और कल्याणजी-आनंदजी का संगीत इस गीत को खास बनाते हैं. फिल्म में यह गीत मनोज कुमार पर फिल्माया गया था और करीब छह दशक बाद भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है.
‘उपकार' से जुड़ा है देशभक्ति का ये अमर गीत
उपकार साल 1967 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन मनोज कुमार ने किया था. फिल्म की कहानी में देश, किसान, मिट्टी और पारिवारिक रिश्तों को अहम जगह दी गई थी. इसी पृष्ठभूमि में ‘मेरे देश की धरती' ने फिल्म के देशभक्ति वाले भाव को और मजबूत किया. गाने में भारतीय मिट्टी, खेती और किसानों की मेहनत का गौरव दिखाई देता है. यही वजह है कि यह गीत सिर्फ सैनिकों या सीमा तक सीमित देशभक्ति की बात नहीं करता, बल्कि खेतों और मेहनतकश भारत को भी देश की पहचान से जोड़ता है.
महेंद्र कपूर की आवाज ने गीत में भरा जोश
इस गीत को महेंद्र कपूर ने अपनी दमदार आवाज में गाया था. संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने इसकी धुन तैयार की, जबकि गीत के बोल गुलशन बावरा ने लिखे. गीत की सबसे बड़ी खासियत इसकी सादगी और जोश है. इसमें देश की धरती को सोना, हीरे और मोती उगाने वाली धरती के रूप में देखा गया है. साथ ही किसान, खेत और मेहनत को देश के गौरव से जोड़ा गया है. यही भाव इसे पीढ़ियों से जोड़ता आया है.
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इस गीत की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि महेंद्र कपूर को ‘मेरे देश की धरती' के लिए 1968 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ पुरुष पार्श्व गायक का सम्मान मिला था. इसी गीत के लिए गुलशन बावरा को फिल्मफेयर में सर्वश्रेष्ठ गीतकार का पुरस्कार भी मिला.
मनोज कुमार और ‘भारत कुमार' की पहचान
मनोज कुमार की फिल्मों में देशभक्ति हमेशा एक महत्वपूर्ण विषय रही और उपकार ने इस छवि को और मजबूत किया. ‘मेरे देश की धरती' में भी उनकी स्क्रीन मौजूदगी गीत के भाव को सीधे दर्शकों तक पहुंचाती है. खेत, किसान और मिट्टी से जुड़े दृश्य तथा महेंद्र कपूर की आवाज मिलकर ऐसा प्रभाव पैदा करते हैं, जिसे आज भी स्वतंत्रता दिवस के माहौल में महसूस किया जाता है.
यही वजह है कि 59 साल बाद भी यह गीत पुराना होकर भी पुराना नहीं लगता. स्कूलों के कार्यक्रमों से लेकर स्वतंत्रता दिवस समारोहों और घरों में बजने वाली प्लेलिस्ट तक, ‘मेरे देश की धरती' आज भी देशभक्ति के उन गीतों में शामिल है जिन्हें सुनते ही 15 अगस्त का माहौल याद आने लगता है. यह गीत बताता है कि देशभक्ति केवल सीमा पर खड़े जवानों की कहानी नहीं, बल्कि उस मिट्टी, किसान और मेहनत से भी जुड़ी है जो देश को आगे बढ़ाती है.
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