विज्ञापन

57 साल पुराना गाना, सेब के बगान में ‘फूल’ बनीं हीरोइन तो हीरो का मचल उठा दिल, पर्दे के पीछे छिपा मुखड़ा देखने की जिद, रफी-आशा की आवाज ने बनाया सदाबहार

साधना पर्दे के पीछे से तड़पाती रहीं और संजय खान दीदार के लिए मिन्नतें करते रहे. मोहम्मद रफी-आशा भोसले की आवाज ने 57 साल पुराने इस रोमांटिक गाने को यादगार बना दिया.

57 साल पुराना गाना, सेब के बगान में ‘फूल’ बनीं हीरोइन तो हीरो का मचल उठा दिल, पर्दे के पीछे छिपा मुखड़ा देखने की जिद, रफी-आशा की आवाज ने बनाया सदाबहार
संजय खान और साधना का यह गाना आज भी नौजवानों का फेवरेट

पर्दे के पीछे छिपा हसीन चेहरा, उसे देखने के लिए बेचैन आशिक और प्यार में डूबी ऐसी शरारत कि हर अदा पर दिल हार जाए. हिंदी सिनेमा में रोमांस के कई अंदाज देखने को मिले, लेकिन 57 साल पहले पर्दे पर आई इस जोड़ी की अदा कुछ अलग थी. हीरो अपनी महबूबा का दीदार करने के लिए इस कदर बेताब था कि उससे पर्दा हटाने की गुजारिश करने लगा. उधर, हीरोइन भी अपने आशिक को तड़पाने का कोई मौका नहीं छोड़ रही थी. मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में सजा यह गाना आज भी पुराने जमाने के रोमांस की याद दिलाता है. गाने का नाम है ‘ये पर्दा हटा दो', जो फिल्म ‘एक फूल दो माली' का हिस्सा था.

साधना की अदाओं पर फिदा हुए संजय खान

साल 1969 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक फूल दो माली' में साधना और संजय खान की जोड़ी नजर आई थी. फिल्म के गाने ‘ये पर्दा हटा दो' में दोनों के बीच की नोकझोंक देखने लायक है. संजय खान अपनी महबूबा का चेहरा देखने के लिए बेकरार हैं, लेकिन साधना पर्दे के पीछे से उन्हें तड़पाती नजर आती हैं. यही छेड़छाड़ गाने को दिलचस्प बनाती है.

इस गीत को मोहम्मद रफी और आशा भोसले ने अपनी आवाज दी थी. प्रेम धवन ने इसके बोल लिखे थे, जबकि संगीत रवि ने तैयार किया था. रफी की आवाज में आशिक की बेकरारी और आशा भोसले की गायकी में हीरोइन की शरारत गाने को खास बना देती है. यही वजह है कि दशकों बाद भी यह गीत पुराने हिंदी सिनेमा के रोमांटिक गानों में अपनी अलग पहचान रखता है.

प्यार की कहानी में आया ऐसा मोड़, बदल गई जिंदगी

फिल्म ‘एक फूल दो माली' का निर्देशन देवेंद्र गोयल ने किया था. इसमें साधना ने सोमना और संजय खान ने अमर का किरदार निभाया था. बलराज साहनी भी फिल्म में अहम भूमिका में नजर आए थे. कहानी अमर और सोमना के प्यार से शुरू होती है, लेकिन दोनों की जिंदगी में ऐसा मोड़ आता है, जो उनके रिश्ते को मुश्किल में डाल देता है.

अमर पहाड़ पर चढ़ाई के दौरान लापता हो जाता है और उसे मृत मान लिया जाता है. दूसरी तरफ, सोमना गर्भवती होती है और उसे अकेले जिंदगी की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे वक्त में कैलाशनाथ उसका सहारा बनते हैं और बच्चे को अपना नाम देने के लिए उससे शादी कर लेते हैं. कुछ साल बाद अमर की वापसी होती है, जिससे सोमना की जिंदगी में फिर उथल-पुथल मच जाती है.

फिल्म की कहानी के साथ गाने ने भी जीता दिल

‘एक फूल दो माली' में प्यार, त्याग और रिश्तों की उलझनों को दिखाया गया था. फिल्म की कहानी ने दर्शकों को भावुक किया, वहीं इसके गानों ने भी खूब लोकप्रियता हासिल की. ‘ये पर्दा हटा दो' उनमें से एक है, जिसकी सबसे बड़ी खासियत इसका सादगी भरा रोमांस है.

ये भी पढ़ें: 30 हजार गाने गाने वालीं लता मंगेशकर की अंतिम विदाई में गूंजा था उनका ये सदाबहार गीत, 56 साल पहले शम्मी-आशा की एक्टिंग ने कर दिया था अमर

आज के दौर में प्यार जताने के तरीके भले बदल गए हों, लेकिन इस गाने में दिखने वाली छेड़छाड़ और दीदार की बेकरारी आज भी लोगों को मुस्कुराने पर मजबूर कर देती है. यही पुराने हिंदी गानों का जादू है, जो बीते दौर की कहानियों को आज भी हमारे करीब ले आता है.

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Ek Phool Do Mali, Sanjay Khan, Sadhana, Entertainment
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com