बॉलीवुज में जब भी किसी फिल्म की बात होती है, तो उसमें रोमांस, गाने और शानदार म्यूजिक का जिक्र जरूर आता है. गानों के बिना कोई फिल्म बन ही नहीं पाती है. कई फिल्में ऐसी हैं जिनकी कहानी से ज्यादा उसके गाने हिट हुए. लेकिन जरा सोचिए, कोई ऐसी फिल्म जिसमें न तो कोई रोमांटिक गाना था, न हीरो- हीरोइन का डांस, लेकिन इसके बाद भी उस फिल्म में म्यूजिक डायरेक्टर के नाम को शामिल किया गया. ये फिल्म थी राजेश खन्ना और नंदा की जिसकी कहानी ऐसी थी कि उसमें ही दर्शक उलझे हुए थे, इसमें कोई गाना नहीं था. साल 1969 में 10 अक्टूबर रिलीज हुई इस फिल्म ने इस बात को साबित कर दिया कि गानों के बिना भी फिल्म को सफल बनाया जा सकता है. 57 साल पुरानी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. तो चलिए जानते हैं इस बिना गाने वाले फिल्म के बारे में.
बिना गानों के बनी थी फिल्म
57 साल पहले साल 1969 में आई फिल्म इत्तेफाक, जो एक मिस्ट्री थ्रिलर फिल्म थी. इस फिल्म को बीआर चोपड़ा ने प्रोड्यूस किया था और उनके भाई यश चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म में राजेश खन्ना के साथ नंदा ने लीड रोल प्ले किया था. इसके अलावा उनके साथ फिल्म में बिंदू, सुजीत कुमार, मदन पुरी और इफ्तेखार जैसे कलाकारों ने भी अभिनय किया था. फिल्म की खासियत थी कि इसमें एक भी गाना नहीं था. ये वो दौर था जब फिल्म की कहानी में गाने एक अहम हिस्सा हुआ करते थे. लेकिन 'इत्तेफाक' ने इस परंपरा को पीछे छोड़ते हुए एक अलग ही रास्ता चुना. फिल्म की कहानी को आगे बढ़ाने के लिए गानों के बजाय सस्पेंस, डॉयलाग और कलाकारों के अभिनय पर भरोसा किया गया.
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सलिल चौधरी को क्यों मिला म्यूजिक डायरेक्टर का क्रेडिट?
इस फिल्म में एक भी गाना नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि इसमें संगीतकार का कोई काम नहीं थी. इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर सलिल चौधरी थे, जो हिंदी सिनेमा में अपने एक अलग अंदाज के लिए जाने जाते थे. इत्तेफाक फिल्म का कहानी, उसके सस्पेंस ने ही दर्शकों के दिलों में जगह बना ली. यही वजह है कि फिल्म का संगीत क्रेडिट अपने आप में दिलचस्प बन गया. ये कोई पहली बार नहीं था कि कोई फिल्म बिना गानों के बनी है. इसके पहले साल 1960 में आई फिल्म कानून में भी कोई गाना नहीं था, लेकिन संगीत की जिम्मेदारी सलिल चौधरी के पास थी. फिल्म में नंदा ने लीड रोल प्ले किया था. यानी 'इत्तेफाक' इस मामले में बीआर फिल्म्स की एक पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाती नजर आई.
एक रात की कहानी और बॉक्स ऑफिस पर धमाल
'इत्तेफाक' की कहानी दिलीप (राजेश खन्ना) के इर्द-गिर्द घूमती है, उसके ऊपर अपनी ही पत्नी की हत्या का आरोप लगता है. दिलीप पुलिस से खुद को बचाते हुए रेखा( नंदा) के घर पहुंच जाता है. इसके बाद शुरु होती है कहानी जिसमें शक, डर और सवाल होते हैं. फिल्म का कहानी एक रात के साथ आगे बढ़ती है, जो दर्शकों के मन में सवालों के घेरा बना देती है कि आखिर सच क्या है. इस फिल्म में गाने न होने के साथ ही एक और चीज थी, जो इसे खास बनाती है और वो था इंटरवल. इस फिल्म में गानों के साथ ही इंटरवल भी नहीं रखा गया है. यह उस समय के हिंदी सिनेमा के लिए एक अलग प्रयोग था. फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर सेमी-हिट बताया जाता है, े लेकिन राजेश खन्ना की सक्सेसफुल फिल्मों में इसे गिना जाता है.
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