हिंदी सिनेमा में कई ऐसे गाने बनें होते हैं, जिनको सुनते ही पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं. आज हम एक ऐसे गीत की बात करेंगे जिसकी खासियत सिर्फ इसके बोल या फिर गायकों की आवाज नहीं, बल्कि इसके पीछे छिपी दिलचस्प कहानी है. जब भी कोई गाना बनता है तो उसके पीछे कई कहानियां और दिलचस्प किस्से होते हैं. ऐसा ही एक गाना है जो आज भी प्यार करने वालों के दिलों में एक खास जगह बनाए हुए है. 53 साल पुराना अमिताभ और जया बच्चन का एक गाना, जिसे बेहद प्यार मिला. लेकिन इस गाने को जड़ें बंगाल के मशहूर संगीत से जुड़ी हुई हैं. किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में ये गाना आज भी अमर है. जो दो प्यार करने वालों के मन की बातों को इतनी बखूबी बता रहा है कि हर कोई इससे एक अलग जुड़ाव महसूस करता है.
रवींद्र संगीत से जुड़ी है गाने की धुन
हम बात कर रहे हैं हिंदी सिनेमा के सबसे खूबसूरत रोमांटिक गीतों में शुमार 'तेरे मेरे मिलन की ये रैना' प्रेम, विरह और भावनाओं की गहराई को बेहद खूबसूरती से बयां करता है. यतींद्र मिश्रा ने भी इस गीत के संगीत और उसकी प्रेरणा से जुड़ी दिलचस्प बात बताई है, उन्होंने बताया कि,
"इस गीत की प्रेरणा गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के प्रसिद्ध रवींद्र संगीत "जोदि तारे नाय चिनी गो शेकी..." से ली गई थी, जिसे उन्होंने बसंत ऋतु और प्रेमी-प्रेमिका की भावनाओं को केंद्र में रखकर लिखा था. संगीतकार एस.डी. बर्मन ने इस बंगाली धुन को हिंदी सिनेमा के लिए बेहद संवेदनशीलता के साथ नया रूप दिया. खासतौर पर इसके इंटरल्यूड्स उनकी संगीत प्रतिभा का शानदार उदाहरण हैं. गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे, जबकि इसकी धुन राग मालगुंजी पर आधारित है और इसे रूपक ताल में बांधा गया है. साजों की बात करें तो गीत में सितार, स्पेनिश गिटार, तबला, बोंगो, बांसुरी, पियानो और वायलिन का सुंदर इस्तेमाल किया गया है. इसे किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज से अमर बना दिया." गाने के बोल इस तरह हैं-
तेरे मेरे मिलन की ये रैना
हो तेरे मेरे मिलन की ये रैना
नया कोई गुल खिलायेगी
नया कोई गुल खिलायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना
देखो ना
देखो ना तेरे मेरे मिलन की ये रैना
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आ आं आ आ
नन्हां सा गुल खिलेगा अँगना
सूनी बइंयाँ सजेगी सजना
नन्हां सा गुल खिलेगा अँगना
सूनी बइंयाँ सजेगी सजना
जैसे खेले चंदा बादल में
खेलेगा वो तेरे आंचल में
चंदनिया गुनगुनायेगी
चंदनिया गुनगुनायेगी
तभी तो चंचल हैं तेरे नैना देखो ना
देखो ना तेरे मेरे मिलन की ये रैना
अमिताभ-जया की कहानी में खास था यह गाना
फिल्म 'अभिमान' (1973) का निर्माण अमिया पिक्चर्स ने किया था, जिसका नाम अमिताभ और जया के नामों को मिलाकर रखा गया था. फिल्म का निर्देशन ऋषिकेश मुखर्जी ने किया था. कहानी एक सफल गायक और उसकी पत्नी के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां पत्नी की बढ़ती लोकप्रियता पति के अहंकार को चुनौती देने लगती है. फिल्म में अमिताभ बच्चन ने गायक की भूमिका निभाई थी, जबकि जया भादुड़ी उनकी पत्नी के किरदार में नजर आई थीं. दिलचस्प बात यह है कि अमिताभ के किरदार के लिए किशोर कुमार, मोहम्मद रफी और मनहर उधास तीन अलग-अलग गायकों ने अपनी आवाज दी थी. फिल्म में डेविड, असरानी और बिंदु भी अहम भूमिकाओं में दिखाई दिए थे. फिल्म की कहानी में संगीत सिर्फ मनोरंजन का हिस्सा नहीं, बल्कि किरदारों की भावनाओं को समझने का जरिया भी है. यही वजह है कि फिल्म के गीत आज भी याद किए जाते हैं.
फिल्मफेयर पुरस्कार से लेकर आज तक कायम है जादू
'तेरे मेरे मिलन की ये रैना' की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एस.डी. बर्मन को इसके लिए 1973 का फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक पुरस्कार मिला था. वहीं, यह गीत उसी साल की बिनाका गीतमाला की वार्षिक सूची में 16वें स्थान पर रहा. आज भी 'तेरे मेरे मिलन की ये रैना' हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय और यादगार युगल गीतों में गिना जाता है. इस गाने की खूबसूरती ये है कि इसमें प्यार और साथ निभाने की उम्मीद को बेहद सरल अंदाज में पेश किया गया है. किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाजों का मेल, मजरूह सुल्तानपुरी के बोल और एस.डी. बर्मन का संगीत इसे खास बनाते हैं. पांच दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी यह गीत हिंदी फिल्म संगीत के यादगार रोमांटिक गानों में शामिल है.
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