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50 साल पुराना चित्रहार के आखिर में बजने वाला गाना, माशूक को पड़े पत्थर, माशूका का टूटा दिल, थिएटर में बहे आंसू, लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया कल्ट

हिंदी सिनेमा में साल 1976 में ऋषि कपूर और रंजीता कौर की फिल्म आई जिसने बॉलीवुड में एक अलग ही मुकाम हासिल किया. फिल्म का एक गाना जिसमें ऋषि कपूर ने पागल का किरदार निभाया, उस गाने को देखकर थिएटर में रोने लगे थे दर्शक.

50 साल पुराना चित्रहार के आखिर में बजने वाला गाना, माशूक को पड़े पत्थर, माशूका का टूटा दिल, थिएटर में बहे आंसू, लता मंगेशकर की आवाज ने बनाया कल्ट
मजनू को पड़े पत्थर, तो लैला ने लगाई फरियाद, गाना देख रोने लगे थे दर्शक
नई दिल्ली:

हिंदी सिनेमा में 70 के दशक में आए गानों और फिल्मों का जलवा आज भी बरकरार है. आज के समय में भी लोग उन गानों को सुनकर खुद से उनसे कनेक्ट कर पाते हैं. यहीं वजह है कि सालों बाद भी करोड़ों लोग उन गानों से जुड़े हुए हैं. आज हम बॉलीवुड की फिल्म लैला-मजनू जो साल 1975 में रिलीज हुई थी के एक गाने की बात करेंगे, जिसको देखने के बाद लोग थिएटर में रोने लगे थे. पुराने गानों के लेकर आज भी लोग कहते हैं कि जो बात पुराने गानों में थी, वो आज के गानों में नहीं देखने को मिलती है. गाने आते हैं हिट होते हैं और फिर कुछ समय बाद लोग उनको भूल जाते हैं. 

फिल्म लैला-मजनू का गाना

साल 1976 में आई फिल्म लैला-मजनू का निर्देशन हरमन सिंह रवैल ने किया था. फिल्म का गाना 'कोई पत्थर से न मारे मेरे दीवाने को' गाना सुपरहिट हुआ था. इस गाने में ऋषि कपूर और रंजीता कौर ने अभिनय किया था. इस गाने के बोल साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और इस गाने के संगीत को जयदेव ने पूरा किया था. लता मंगेशकर की आवाज का दर्द सीधे दिल तक पहुंच जाता है. आज भी लोग इस गाने को सुनकर दीवाना महसूस करने लगते हैं. ये गाना बिनाका गीतमाला पर हफ्तों तक नंबर वन पर रहा.

इस गाने को सुनने के बाद लोग थिएटर में रोने लगे थे. इसके बोल, संगीत और लता दीदी की आवाज ने इस कालजयी बना दिया. इस गाने को सुनते ही 40 के दशक का वो दर्द आज भी याद आ जाता है. गाने के बोल इस प्रकार थे-

हुस्न हाजिर है मुहब्बत
की सजा पाने को
हुस्न हाजिर है मुहब्बत
की सजा पाने को
कोई पत्थर से ना
मारे मेरे दीवाने को
कोई पत्थर से ना
मारे मेरे दीवाने को
कोई पत्थर से ना
मारे मेरे दीवाने को

फिल्म की कहानी और बजट

फिल्म में ऋषि कपूर, रंजीता कौर और डैनी डेन्जोंगपा ने अभिनय किया था. फिल्म में लैल और मजनू की प्रेम कहानी दिखाई गई है. लेकिन दोनों के प्यार के खिलाफ उनका परिवार हो जाता है और दोनों को अलग करता है. लैला के पिता उनकी शादी किसी राजकुमार से करना चाहते हैं. लैला से बिछड़कर मजनू उनकी यादों में खो जाता है और दीवानगी की हद पार कर मजनू यानि पागल के तौर पर जाना जाता है. जिसके बाद लैला की शादी होती है और मजनू से दूर होने के दुख में उसकी जान चली जाती है. उसकी कब्र पर पहुंचकर मजनू भी अपने प्राण त्याग देता है. इसी तरह फिल्म एक दुखद अंत के साथ खत्म हो जाती है. 

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विकिपीडिया में साझा जानकारी के मुताबिक फिल्म का बजट 1.70 करोड़ था. फिल्म का ग्रॉस कलेक्शन 8.50 करोड़ हुआ था. 

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