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जां निसार अख्तर की शायरी से बना लता मंगेशकर का 43 साल पुराना गाना, हेमा मालिनी ने दिखाया मोहब्बत का दर्द, सिंगल लड़कियों की प्लेलिस्ट में शामिल

जां निसार अख्तर की शायरी को मिली लता मंगेशकर की आवाज और पर्दे पर हेमा मालिनी ने बयां किया मोहब्बत का दर्द, तो बना ऐसा गाना जिसका जादू 43 साल बाद भी कम नहीं हुआ.

जां निसार अख्तर की शायरी से बना लता मंगेशकर का 43 साल पुराना गाना, हेमा मालिनी ने दिखाया मोहब्बत का दर्द, सिंगल लड़कियों की प्लेलिस्ट में शामिल
हेमा मालिनी का 43 साल पुराना गाना बयां करता है सिंगल लड़कियों का दर्द, जां निसार अख्तर की शायरी
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लता मंगेशकर की आवाज में वो जादू था, जो किसी भी गीत को हमेशा के लिए यादगार बना देता था. उनकी आवाज में गाए कई गाने ऐसे हैं, जिनसे आज भी लोग अपनी जिंदगी को जोड़ लेते हैं. ऐसा ही एक गीत 43 साल पहले रिलीज हुआ था, जो आज भी तन्हाई और अधूरे प्यार का एहसास कराता है. बात हो रही है फिल्म ‘रजिया सुल्तान' के मशहूर गाने ‘ऐ दिल-ए-नादान' की. हेमा मालिनी पर फिल्माए गए इस गीत में एक ऐसी लड़की के दिल की बेचैनी और अकेलापन नजर आता है, जो प्यार की तलाश में है. खास बात यह है कि गीत के बोलों में उर्दू शायरी की खूबसूरत झलक भी दिखाई देती है.

रेगिस्तान में फिल्माया गया था ‘ऐ दिल-ए-नादान'

साल 1983 में आई फिल्म ‘रजिया सुल्तान' में हेमा मालिनी ने दिल्ली सल्तनत की शासक रजिया सुल्तान का किरदार निभाया था. फिल्म का निर्देशन कमाल अमरोही ने किया था. इसी फिल्म में ‘ऐ दिल-ए-नादान' गीत को शामिल किया गया था, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी. गाने में हेमा मालिनी का शाही अंदाज और रेगिस्तान का सुनसान माहौल कहानी को और गहरा बना देता है.

गीत में एक ऐसी स्त्री के मन की भावनाएं दिखाई गई हैं, जो अपने दिल की बात समझने की कोशिश कर रही है. यही वजह है कि इतने साल बाद भी यह गीत उन लोगों को अपना सा लगता है, जो अकेलेपन या अधूरे प्यार के दौर से गुजर रहे हैं.

जां निसार अख्तर की कलम ने दिया शायराना अंदाज

‘ऐ दिल-ए-नादान' के बोल मशहूर शायर और गीतकार जां निसार अख्तर (Jan Nisar Akhtar) ने लिखे थे. उनकी शायरी में उर्दू की मिठास और भावनाओं की गहराई साफ नजर आती थी. इस गीत में भी उन्होंने दिल की उलझन, तन्हाई और प्यार की तलाश को बेहद खूबसूरती से शब्द दिए. जां निसार अख्तर हिंदी सिनेमा के साथ-साथ उर्दू अदब की दुनिया में भी अपनी अलग पहचान रखते थे. उनके लिखे कई गीतों में शायरी की खूबसूरत छाप देखने को मिलती है. ‘ऐ दिल-ए-नादान' भी उन्हीं यादगार रचनाओं में शामिल है.

कमाल अमरोही की फिल्म का यादगार गीत

‘रजिया सुल्तान' एक पीरियड ड्रामा फिल्म थी, जिसमें हेमा मालिनी के साथ धर्मेंद्र और परवीन बाबी जैसे कलाकार भी नजर आए थे. कमाल अमरोही ने फिल्म की कहानी और निर्देशन दोनों संभाले थे. फिल्म के बाकी हिस्सों से अलग ‘ऐ दिल-ए-नादान' अपने शांत और भावुक अंदाज के लिए खास बन गया. लता मंगेशकर की आवाज, जां निसार अख्तर के शायराना बोल और हेमा मालिनी की अदाकारी ने इसे यादगार बना दिया. 43 साल बाद भी यह गीत सुनने पर लगता है जैसे किसी अकेले दिल की कहानी आज भी उतनी ही ताजा है.

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