नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी, रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश के लीड रोल वाली रामायण आज यानी कि 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है. फिल्म के साथ ही फिल्म का म्यूजिक भी चर्चा में रहा है. इसी खास म्यूजिक को लेकर NDTV ने फिल्म के लिए गाने लिखने वाले जाने माने कवि और लेखक कुमार विश्वास से खास बातचीत की. इस बातचीत के दौरान कुमार विश्वास ने बताया कि उनके लिए कौनसा गाना लिखना सबसे बड़ा चैलेंज था.
रामायण के लिए गाना लिखने के लिए रखा किन बातों का खास खयाल
कुमार विश्वास ने कहा, देखिए पहली बात तो यह है कि रामायण या राम के किसी भी काम से जुड़ना किसी भी व्यक्ति के लिए सौभाग्य का विषय होता है. मैंने इससे पहले भी चुनिंदा फिल्मों के गाने लिखे हैं और वे सामान्य तौर पर वैसे ही लिखे हैं, जैसे फिल्में लिखवाती हैं. अपनी धुन पर, अपनी बातों पर और अपनी शर्तों पर. लेकिन यह पहला काम था जिसमें मैंने अपने मन और आत्मा के साथ काम किया. इस टीम के साथ लगभग पिछले तीन साल से लगातार काम किया है. मेरे जीवन की, मतलब अब तक की और आगे तक की भी सबसे बड़ी फिल्म बन गई है यह, क्योंकि इससे बड़ा विषय पृथ्वी पर कोई है नहीं. साथ ही हमेशा से जो बेस्ट लोग हो सकते थे, उनके संपर्क में रहकर काम किया.
कुमार ने कहा, हम सब रहमान साहब की बहुत इज्जत करते हैं और उनके संगीत का जादू पूरा विश्व जानता है. इसलिए मेरे लिए पूरी फिल्म की प्रक्रिया से जुड़े रहना अहम था. मैं केवल गाना नहीं लिख रहा था, बल्कि पूरा देख रहा था कि एक दृश्य क्या बन रहा है, गाना कहां जा रहा है और उसकी डिटेलिंग पर बहुत काम कर रहा था. इसलिए मैंने बहुत सादे मन से एक बात सोची कि मैं इसमें कुछ नया न लिखूं. श्रीमद् वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस या रामकथा के दूसरे मानक ग्रंथों में उस समय जो स्थिति बनाई गई थी, उसी भाषा को आज की बोलचाल की भाषा में लिख दूं जैसे, ‘तुम्हारे बिना स्वर्ग भी व्यर्थ, तुम ही हो इस जीवन का अर्थ'. अब मुझे कहा गया कि राम और सीता के बीच का संवाद है. यह एक-दूसरे से कभी अलग न होने वाले प्रेमियों की बातचीत है. इसमें मेरी क्या औकात थी, मेरी क्या हिम्मत थी कि मैं लिख सकता था.
"तो मैंने उन्हीं ग्रंथों को दोबारा पढ़ा, उन्हीं से जाना और उन्हीं से पूछा. वाल्मीकि जी से पूछा कि ऐसे समय पर भगवान क्या कह रहे थे? तो भगवान सीता जी से कह रहे थे कि ‘तुम्हारे बिना जीते हुए मैं स्वर्ग भी स्वीकार नहीं कर सकता' तो इसे तुरंत मैंने बदल दिया, ‘तुम ही हो इस जीवन का अर्थ, तुम्हारे बिना स्वर्ग भी व्यर्थ' इस तरह की कोशिश की कि गीत मैं न लिखूं, बल्कि गीत मेरे माध्यम से उतरें."
सवाल- आपने जितने गाने लिखे हैं उनमें से कौन-सा ऐसा गाना था, जिसे लिखने में आपको सबसे ज्यादा मुश्किल हुई या सबसे ज्यादा वक्त लगा?
उन्होंने कहा, सबसे ज्यादा वक्त ‘जुड़ी जोड़ी' में लगा, क्योंकि राम जी और सीता जी के विवाह के लिए लगभग छह-सात अलग-अलग गानों के ड्राफ्ट बने. हर बदलाव पर यही होता था कि नहीं, यह ठीक नहीं हो रहा है, यह ठीक नहीं हो रहा है. अब समस्या यह थी कि इस फिल्म में गाना बनाने की प्रोसेस में केवल रहमान साहब या हंस जिमर साहब ही शामिल नहीं थे. इसमें डायरेक्टर नितेश तिवारी जी की भी म्यूजिक की समझ बहुत कमाल की है. सबसे बड़ी बात यह है कि प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की भी बहुत जबरदस्त म्यूजिक सेंस है. वह हर पहलू से देखना चाहते थे. वह चाहते थे कि एक नया आदमी, एक नया बच्चा भी इसे सुने तो कैसे समझे. हम कुछ बिल्कुल नया भी न करें कि सब कुछ अलग ही हो जाए और हम पुराने ‘मंगल भवन अमंगल हारी' को भी नहीं दोहराएंगे. इसके बीच में कैसे रास्ता निकले? जैसे ‘जय जय राम' रचते समय उनका मन यही था कि भगवान की ऐसी आरती बने, जिसे कोई भी सुने तो उसे लगे कि हां, आरती तो ऐसी ही होती है.
सवाल: रणबीर और साई पल्लवी, खास तौर पर रणबीर को कौन-सा गाना ज्यादा पसंद आया? जब उन्होंने आपके मुंह से गाने के बोल सुने होंगे या रिकॉर्डिंग के वक्त उन्हें सुनने का मौका मिला होगा तो किस गाने को सुनकर आपको लगा होगा कि रणबीर ने कहा होगा कि वाह, इस तरह की अलग दुनिया मैंने कभी न देखी, न सुनी?
जवाब: एक तो उन्हें ‘जुड़ी जोड़ी' बहुत ज्यादा पसंद आया. उनके लूप में यह गाना चढ़ गया था. जब गाना स्क्रैच में था तब भी वह कहते थे कि इसको मुझे दोबारा सुनना है. ‘जुड़ी जोड़ी' से वह बहुत ज्यादा जुड़े थे. बाकी गाने भी मुझे पसंद आए. एक गाने का मैं खास तौर पर जिक्र करना चाहूंगा जिसे लोग थोड़ा कम देख रहे हैं. वह गाना था ‘तांडव वाला'. उसमें ज्यादा काम कर नहीं सकते थे, क्योंकि उसमें जो वर्ड्स की कंपोजिशन थी, उन्हीं में हिंदी और संस्कृत के शब्द भरने थे. केवल आवाज के लिए शब्द नहीं भर सकते थे तो जिन्होंने कहा कि ‘जय जय राम' बहुत सीधा हो गया बहुत ही ऐसा हो गया ‘मेरे चारों धाम' उन लोगों को ‘तांडव' सुनना चाहिए.
"‘तांडव' में भाषा के माध्यम से मैंने कोशिश की. जैसे रावण जब कहता है कि मुझे देखो, मैंने सब जीत लिया है तो रहमान साहब ने मुझे सिर्फ हमिंग दी. अब वह ‘धुं-धुं-धुं-धुं-धुं' है, इसमें क्या लिखेंगे आप? लेकिन फिर भी मैंने कोशिश की कि उसमें अर्थ के साथ लिखूं.
उसमें लिखा हुआ है:
‘वक्र विजित' यानी जो टेढ़ा है, उसको जीत लिया है.
‘शक्र विजित' यानी जो इंद्र हैं, उनको जीत लिया है.
‘चक्र विजित' यानी चक्रवर्ती रूप से सबको जीत लिया है.
‘दर्श-दर्श रावण दर्श', यानी मुझे देखो, मैं रावण हूं, मैंने सबको जीत लिया है.
तो उसमें देखा जाए तो संस्कृत को हिंदी बनाकर पेश कर दिया गया है. वह गाना लिखना सबसे मुश्किल था. उसमें जितनी भी लाइनें लिखी गईं, वे सभी कठिन थीं.
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