विज्ञापन

34 साल पहले रोमांटिक हीरो बन पूरे भारत में छा गया था ये एक्टर, पैरालाइज ने बिगाड़ा करियर, आज चलाता है 3,300 करोड़ का बिजनेस

एक्टर अरविंद स्वामी का सफर फिल्म इंडस्ट्री में काफी अलग रहा है. 1990 के दशक में तमिल सिनेमा के लोकप्रिय चेहरे बने, फिर एक्टिंग छोड़कर बिजनेस पर ध्यान दिया. चोट के लंबे इलाज के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और करियर फिर से बनाया.

34 साल पहले रोमांटिक हीरो बन पूरे भारत में छा गया था ये एक्टर, पैरालाइज ने बिगाड़ा करियर, आज चलाता है 3,300 करोड़ का बिजनेस
34 साल पहले रोमांटिक हीरो बन पूरे भारत में छा गया था ये एक्टर, पैरालाइज ने बिगाड़ा करियर
NDTV

एक्टर अरविंद स्वामी का सफर फिल्म इंडस्ट्री में काफी अलग रहा है. 1990 के दशक में तमिल सिनेमा के लोकप्रिय चेहरे बने, फिर एक्टिंग छोड़कर बिजनेस पर ध्यान दिया. चोट के लंबे इलाज के बाद उन्होंने फिल्मों में वापसी की और करियर फिर से बनाया. दिलचस्प बात यह है कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था. वे डॉक्टर बनना चाहते थे. अपोलो हॉस्पिटल्स के संस्थापक डॉ. प्रताप सी. रेड्डी से प्रेरित होकर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा. लेकिन उनके पिता बिजनेसमैन वी.डी. स्वामी ने बिजनेस करने पर जोर दिया. अरविंद ने बी.कॉम किया और अमेरिका में इंटरनेशनल बिजनेस की पढ़ाई के लिए गए, लेकिन परिवार की वजह से कोर्स अधूरा छोड़कर लौट आए.

अरविंद स्वामी का डेब्यू

1991 में मणि रत्नम की फिल्म ‘थलपति' से उन्होंने डेब्यू किया. अगली फिल्म ‘रोजा' (1992) ने उन्हें रोमांटिक हीरो बना दिया. इसके बाद ‘पासामलरगल', ‘बॉम्बे' और ‘मिनसारा कनवू' जैसी फिल्में आईं. लेकिन वे स्टार बनने की बजाय फिल्म बनाने की प्रक्रिया सीखना चाहते थे. उन्होंने मणि रत्नम, बालू महेंद्र, जे. महेंद्रन और भारतन जैसे निर्देशकों के साथ काम किया और कमर्शियल फिल्मों से ज्यादा सीखने वाली फिल्में चुनीं.

2000 के दशक की शुरुआत में वे एक्टिंग से दूर हो गए. उन्हें कम अच्छे प्रोजेक्ट मिल रहे थे, इसलिए उन्होंने बिजनेस पर फोकस किया. उन्होंने सोचा था कि 4-5 साल का ब्रेक लेकर वापस लौटेंगे. उन्होंने पिता की कंपनी संभाली, इंटरप्रॉ ग्लोबल और प्रोलीज इंडिया में काम किया. बाद में टैलेंट मैक्सिमस इंडिया नाम की कंपनी बनाई, जो एचआर और पेरोल सॉल्यूशंस देती है. 2022 में इस कंपनी की वैल्यू करीब 3,300 करोड़ रुपये बताई गई थी.

अच्छा बिजनेसमैन नहीं अरविंद स्वामी

इसी दौरान एक बड़ा झटका लगा. मिड-2000 में हादसे में रीढ़ की हड्डी में चोट लगी और एक पैर पैरालाइज हो गया. ठीक होने में 4-5 साल लगे. वजन बढ़ गया और फिटनेस प्रभावित हुई. मणि रत्नम से मुलाकात के बाद 2013 में ‘कडल' से वापसी हुई. 2015 की ‘थनी ओरुवन' ने उनके दूसरे करियर को मजबूत किया. इसके बाद ‘ध्रुव', ‘बोगन', ‘चेक्का चिवंथा वानम', ‘थलाईवी', ‘कस्टडी', ‘मेय्यालगन' और ‘आईसी 814' जैसी फिल्मों-सीरीज में नजर आए.

ट्रूली राम पॉडकास्ट में अरविंद स्वामी ने कहा कि वे खुद को अच्छा बिजनेसमैन नहीं मानते. उनका फोकस परेशानी का समाधान ढूंढने पर रहता है. रोजमर्रा के काम या सिर्फ मुनाफा कमाने में उनकी रुचि नहीं. समाधान बनने के बाद वे आगे बढ़ जाते हैं. वे कर्ज से बचते हैं और कम से कम लोन लेकर बिजनेस बढ़ाना पसंद करते हैं. आजकल कर्ज लेने का ट्रेंड बहुत चल रहा है, लेकिन वे इससे डरते हैं.

अब वे अपने बेटे रुद्र के साथ एआई टेक्नोलॉजी पर काम कर रहे हैं. करीब ढाई साल पहले उन्होंने एआई-बेस्ड बिजनेस इनक्यूबेटर शुरू किया है, जिसमें कई प्रोडक्ट्स विकसित हो रहे हैं.

यह भी पढ़ें | 31 साल पुराना वो गाना, एआर रहमान का संगीत, चित्रा की आवाज और मनीषा कोइराला के अंदाज ने बनाया यादगार

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Arvind Swamy, Arvind Swamy Bollywood Film, Arvind Swamy Empire, Arvind Swamy Roja, Roja
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com