27 साल पहले 3 सितंबर के दिन हिंदी सिनेमा की वो फिल्म रिलीज हुई थी जिसके विलेन ने फैन्स की नींद ही उड़ा दी थी. यही नहीं, फिल्म के अंदर हीरो-हीरोइन का जीना भी मुहाल कर दिया था. 3 सितंबर 1999 को तनुजा चंद्रा निर्देशित थ्रिलर फिल्म संघर्ष रिलीज हुई थी. अक्षय कुमार, प्रीति जिंटा और आशुतोष राणा की इस फिल्म ने दर्शकों को सिनेमाघरों में ही हंगामा बरपा दिया था. खासकर विलेन बने आशुतोष राणा के लज्जा शंकर पांडे के साड़ी वाले अवतार का सीन आज भी याद आता है तो सिहरन दौड़ जाती है.
आशुतोष राणा के इस सीन को आज भी याद किया जाता है, लेकिन आप जानते हैं कि इस किरदार के लिए उन्हें तारीफों के साथ भी कई पुरस्कारों से भी नवाजा गया था.
फिल्म की कहानी
फिल्म बच्चों के अपहरण और बलि जैसे मामलों आधारित साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर है. सीबीआई की नई अधिकारी रीत ओबेरॉय (प्रीति जिंटा) को सीरियल किलर लज्जा शंकर पांडे (आशुतोष राणा) को पकड़ना है। . लिए वह जेल में बंद प्रोफेसर अमन वर्मा (अक्षय कुमार) की मदद लेती है. छोटी रीत का रोल आलिया भट्ट ने किया था.
फिल्म को तनुजा चंद्रा ने डायरेक्ट किया था. कहानी महेश भट्ट ती. फिल्म में जतिन-ललित का म्यूजिक था. इसे हॉलीवुड मूवी द साइलेंस ऑफ द लैम्ब्स से प्रेरित बताया जाता है.
बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन
फिल्म का बजट करीब 4 करोड़ रुपये था. यह 160 स्क्रीन पर रिलीज हुई. पहले दिन करीब 64 लाख रुपये की कमाई हुई और पहले हफ्ते में लगभग 2.97 करोड़ रुपये जुटाए. भारत में नेट कलेक्शन 5.97 करोड़ रहा, जबकि वर्ल्डवाइड ग्रॉस करीब 10.50 6 करोड़ रुपये पहुंचा. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को एवरेज माना गया.
संघर्ष मूवी साउंडट्रैक
प्रीति जिंटा, अक्षय कुमार और आशुतोष राणा की फिल्म में छह गाने थे. म्यूजिक जतिन-ललिल का था और लिरिक्स समीर के थे. फिल्म के दिल का करार सॉन्ग को सोनू निगम और श्रद्दा पंडित ने गाया था. नाराज सवेरा है गाने को कुमार सानू ने गाया था. मंजिल ना कोई को रेमो फर्नांडिस और जसपिंदर नरूला ने गाया था. मुझे रात दिन बस सॉन्ग को सोनू निगम ने गाया था जबकि हम बड़ी दूर चले आए गाने में श्रद्धा पंडित और सोनू निगम की आवाज है.
वो सीन जिसने नींद उड़ा दी
आशुतोष राणा का किरदार लज्जा शंकर पांडे धार्मिक कट्टरपंथी और बच्चों की बलि देने वाला हत्यारा था. फिल्म का सबसे चर्चित दृश्य वह है जब विलेन साड़ी पहनकर सामने आता है और चीखता है. यह दृश्य हीरो-हीरोइन से लेकर दर्शकों तक दोनों की नींद उड़ा देता है. आशुतोष राणा की यह परफॉर्मेंस इतनी प्रभावशाली थी कि उन्हें फिल्मफेयर और जी सिने अवॉर्ड में बेस्ट विलेन का अवॉर्ड भी मिला.
आईएमडीबी पर फिल्म की रेटिंग करीब 6.7-6.8 है. बॉक्स ऑफिस पर औसत रहने के बावजूद फिल्म बाद में कल्ट क्लासिक बन गई. 27 साल बाद भी साड़ी वाला सीन और आशुतोष राणा का किरदार बेजोड़ है.
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