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140 मिनट की वो फिल्म जो आई थी 62 साल पहले, क्लाइमैक्स देता है आज की दृश्यम को मात, राज खोसला की कहानी, IMDb रेटिंग 8.5

‘दृश्यम’ से दशकों पहले बॉलीवुड में सस्पेंस की ऐसी कहानी पर्दे पर आई थी, जिसमें एक रहस्यमयी लड़की ने हर किसी को उलझा दिया. इसका असली सच क्लाइमैक्स में सामने आता है.

140 मिनट की वो फिल्म जो आई थी 62 साल पहले, क्लाइमैक्स देता है आज की दृश्यम को मात, राज खोसला की कहानी, IMDb रेटिंग 8.5
दृश्यम से भी ज्यादा सस्पेंसभरी है 1964 की ये फिल्म

जब भी हिंदी सिनेमा की बेहतरीन सस्पेंस और थ्रिलर फिल्मों का जिक्र होता है, तो आज की फिल्मों में ‘दृश्यम' का नाम सबसे पहले याद आता है. लेकिन बॉलीवुड में रहस्य और रोमांच का दौर आज से नहीं, बल्कि कई दशक पहले शुरू हो चुका था. 60 के दशक में निर्देशक राज खोसला ने ऐसी कई फिल्में बनाईं, जिन्होंने दर्शकों को आखिरी सीन तक अपनी सीट से बांधे रखा. इन्हीं फिल्मों में एक नाम ‘वो कौन थी?' का भी है. 1964 में आई यह फिल्म आज 62 साल बाद भी अपने रहस्य, डरावने माहौल और चौंकाने वाले क्लाइमैक्स की वजह से याद की जाती है.

हर सीन के साथ बढ़ता जाता है रहस्य

राज खोसला को हिंदी सिनेमा में सस्पेंस और मिस्ट्री फिल्मों का माहिर निर्देशक माना जाता था. उनकी फिल्मों की खासियत थी कि कहानी आगे बढ़ने के साथ रहस्य और गहरा होता जाता था. ‘वो कौन थी?' भी इसी अंदाज में बनाई गई थी. फिल्म की शुरुआत ही एक ऐसे रहस्यमयी घटनाक्रम से होती है, जो दर्शकों के मन में कई सवाल खड़े कर देता है.

सुनसान सड़क पर मिली रहस्यमयी लड़की

फिल्म की कहानी डॉक्टर आनंद के इर्द-गिर्द घूमती है. एक रात वह अपनी कार से सुनसान रास्ते से गुजर रहा होता है, तभी रास्ते में एक लड़की उससे लिफ्ट मांगती है. आनंद उसे कार में बैठा लेता है. कुछ देर बाद वह लड़की कब्रिस्तान के पास उतरती है और देखते ही देखते गायब हो जाती है.

इसके बाद कहानी तब और उलझ जाती है, जब आनंद को पता चलता है कि जिस लड़की को उसने लिफ्ट दी थी, उसकी मौत पहले ही हो चुकी है. मामला यहीं खत्म नहीं होता. आनंद की शादी संध्या नाम की लड़की से तय होती है और उसे देखकर उसके होश उड़ जाते हैं, क्योंकि संध्या का चेहरा बिल्कुल उसी रहस्यमयी लड़की जैसा होता है.

आत्मा, इंसान या कोई गहरी साजिश?

इसके बाद फिल्म का सस्पेंस लगातार बढ़ता जाता है. आनंद यह समझ ही नहीं पाता कि उसके सामने आने वाली लड़की आखिर कौन है. क्या वह किसी मृत लड़की की आत्मा है या फिर इसके पीछे कोई इंसानी साजिश छिपी है? फिल्म दर्शकों को भी लगातार शक और सवालों के बीच उलझाए रखती है. कहानी का असली राज आखिर में खुलता है और क्लाइमैक्स पूरी कहानी को एक अलग ही मोड़ दे देता है. यही वजह है कि ‘वो कौन थी?' को आज भी हिंदी सिनेमा की यादगार मिस्ट्री फिल्मों में गिना जाता है.

साधना के डबल रोल ने बढ़ाया रोमांच

फिल्म में साधना, मनोज कुमार और प्रेम चोपड़ा अहम भूमिकाओं में नजर आए थे. साधना ने फिल्म में डबल रोल निभाकर कहानी के रहस्य को और दिलचस्प बना दिया था. फिल्म का संगीत भी इसकी बड़ी खासियत रहा. इसके गाने दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए और आज भी सदाबहार माने जाते हैं.

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1964 में रिलीज हुई ‘वो कौन थी?' उस दौर की सफल फिल्मों में शामिल रही और समय के साथ इसे कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला. फिल्म की कहानी और सस्पेंस इतना पसंद किया गया कि बाद में इसका रीमेक दक्षिण भारतीय भाषाओं में भी बनाया गया. 1966 में तेलुगु में ‘Aame Evaru' और तमिल में ‘Yaar Nee?' नाम से इसके रीमेक रिलीज हुए.

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