फिल्में देखते वक्त हम जब भी एक्टर और एक्ट्रेसेस के कपड़े देखते हैं तो उनकी खूबसूरती हमारे मन में बस जाती है. खासकर अगर फिल्म ऐतिहासिक हो जिसके राजा, महाराजा, महारानियां और बादशाह के शाही कपड़े देखकर दिमाग में यही आता है कि आखिर इन कपड़ों का होता क्या है? ये आते कहां से हैं और बाद में इनका क्या इस्तेमाल होता है. आज हम आपको बताएंगे सालों पहले आई रामायण से लेकर के सल्तनत वाली फिल्मों में पहने जाने वाले ये कपड़े आखिर आते कहा से हैं और जाते कहां है. दरअसल ये कपड़े किराए पर मिलते हैं. यकीन नहीं हो रहा तो चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे की पूरी स्टोरी.
मगनलाल ड्रेसवाला
मुंबई जिसे सपनों की नगरी कहा जाता है, यहां पर मनगलाल ड्रेसवाला वो जगह जहां पर सिर्फ कपड़े नहीं बल्कि किरदारों की पूरी दुनिया तैयार होती है. ये सब मिलता है मगनलाल ड्रेसवाला के पास, जो कोई स्टार या किसी फिल्म का कोई किरदार नहीं, बल्कि साल 1926 में शुरू हुआ एक ऐसा फैमिली बिजनेस हैं, जो पुराने समय से भारतीय सिनेमा से जुड़ा हुआ है. 'मुगल-ए-आजम' से लेकर 'रामायण' और 'आलम आरा' फिल्मों के कई किरदारों को उनका रुप देने में अहम भूमिका निभाई है.
दूल्हों की पगड़ी से शुरू हुई कहानी
मगनलाल ड्रेसवाला जो आज फिल्म जगत का एक जाना-माना नाम है, इसकी शुरुआत साल 1926 में मुंबई के कालबादेवी इलाके में मौजूद एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ था. एक परिवार जो गुजरात के धारी इलाके से ताल्लुक रखता था, यहां पर मगनलाल और हरिलाल उनके भाई दुल्हों के लिए पगड़ी, सेहरा और साफा बनाते थे. इसके बाद जब ये परिवार मुंबई आया तो उन्होंने अपने काम को धीरे-धीरे थिएटर और रामलीला तक पहुंचा. इसके बाद से वो अलग-अलग किरदारों के लिए पोशाकें भी तैयार करने लगे और इस तरह से हिंदी सिनेमा में भी उनकी जान-पहचान हुई और काम मिलने लगा.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उनका नाम ड्रेसवाला पड़ने के पीछे भी एक कहानी है. दरअसल किसी फिल्म के किरदार के कपड़े तैयार करने के लिए वो फिल्म के प्रोड्यूसर से मिलने गए, तब उनके ऑफिस में किसी ने उनको टेलर कहकर बुलाया. इस बात पर उन्होंने खुद को सिर्फ दर्जी मानने से इंकार कर दिया और खुद को ड्रेसवाला बताया. इसी पहचान ने आगे चलकर परिवार और कारोबार का नाम बना दिया.
'आलम आरा' से 'मुगल-ए-आजम' तक पहुंचा नाम
भारतीय फिल्म के इतिहास पर नजर डालें तो मगनलाल ड्रेसवाला का कनेक्शन उस समय से है. मगनलाल के कपड़े साल 1931 में बनी भारत की पहली बोलने वाली फिल्म 'आलम आरा' में भी एक्टर्स ने पहने थे. इसके बाद 'अनारकली', 'राम राज्य' और खास तौर पर 'मुगल-ए-आजम' जैसी फिल्मों के लिए भी ड्रेसवाला ने ही कपड़े तैयार किए थे.
बता दें कि मगनलाल ड्रेसवाला सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि हॉलीवुड में भी अपने काम को पहुंचा चुके हैं. हॉलीवुड रिपोर्टर के मुताबिक उनका काम हॉलीवुड प्रोजेक्ट्स तक भी पहुंचा. उनके कॉस्ट्यूम से जुड़े काम में close encounters of the third kind, life of pie, mission impossible- ghost protocal जैसी फिल्मों के नाम भी शामिल हैं.
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'रामायण' और 'महाभारत' से आज की फैंसी ड्रेस तक
मगनलाल ड्रेसवाला ने साल 1980 के दशक में जब टीवी पर रामानंद सागर की रामायण और बी.आर. चोपड़ा की महाभारत जैसे शोज आने लगे थे, उस समय भी सीरियल के किरदारों के लिए कपड़े मगमलाल ड्रेसवाला के यहां से ही आए थे. उस दौर से लेकर आज तक समय बदला, दौर बदला और फैशन बदला, लेकिन मगनलाल ड्रेसवाला आज भी अपने बिजनेस के साथ मुंबई मे मौजूद है.
मगनलाल ड्रेसवाला का स्टोर मुंबई के विले पार्ले में मौजूद है जहां पर आज भी थिएटर, रामलीला, फैंसी ड्रेस, थीम पार्टी, डांस परफॉर्मेंस से लेकर दूसरी किसी भी फंक्शन के लिए कॉस्ट्यूम किराए पर मिलते हैं. मगनलाल जी की विरासत को आज उनकी तीसरी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है.
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