बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर जातिगत जनगणना कराने की मांग की. नीतीश कुमार का कहना है कि एक बार जातिगत जनगणना हो जाने पर जब सारे तथ्य सामने आ जाएंगे तो उस हिसाब से क्यों नहीं आरक्षण होगा और कब तक एक सीमा तक आरक्षण रहेगा. नीतीश गुरुवार को पटना में कर्पूरी जयंती पर पार्टी द्वारा आयोजित समारोह को सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि एक संदर्भ में 50 प्रतिशत की सीमा लगा दी गयी है लेकिन एक बार जातिगत जनगणना पूरे तौर पर हो जाएगी तो उसके बाद ठीक ढंग से संविधान में प्रावधान करके कोई उपयुक्त उपाय किया जा सकता है ताकि सबको इसका लाभ मिले. नीतीश कुमार की बातों से साफ़ है कि फ़िलहाल उन्हें इस बात की आशा नहीं कि तत्काल वर्तमान आरक्षण नियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि इसे बढ़ाया जाये.
नीतीश ने कहा कि आबादी जैसे बढ़ रही है ऐसी परिस्थिति में अधिक आरक्षण की मांग जायज़ है लेकिन इसका समाधान है जातिगत जनगणना. नीतीश ने लालू यादव या उनके बेटे तेजस्वी यादव का नाम तो नहीं लिया लेकिन याद दिलाया कि जब मंडल कमिशन की अनुशंसा लागू की गयी तो बिहार में कर्पूरी ठाकुर के समय से आरक्षण के प्रावधान को ख़त्म करने की साज़िश रची गयी. लेकिन उन्होंने जब चेतावनी दी कि हम बरदाश्त नहीं करेंगे तब उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन कराने की कोशिश की गयी.
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नीतीश ने लोगों को याद दिलाया कि जब कर्पूरी ठाकुर ने आरक्षण व्यवस्था लागू की जिसके कारण अति पिछड़ी जातियों को अधिक लाभ मिला तो उनके ख़िलाफ़ भी प्रचार किया गया लेकिन वो विचलित नहीं हुए. चुनाव के मद्देनज़र नीतीश ने अति पिछड़ी जातियों में सेंधमारी की कोशिशों के बारे में भी चर्चा की और कहा कि अगर आप अलग-अलग रहेंगे तो सब लोग उसका लाभ उठाएंगे लेकिन अगर आप एकजुट रहेंगे तो आप एक बहुमंजिला इमारत बना सकते हैं और लोग आपके इर्द गिर्द घूमेंगे.
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