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रंधीर कुमार गौतम

रंधीर कुमार गौतम

कॉलमिस्ट

रणधीर कुमार गौतम समाजशास्त्री हैं. वे विश्व निधान सेंटर फॉर एशियन ब्लॉसमिंग (पब्लिक इंटेलेक्चुअल थिंक टैंक) के कार्यकारी सचिव भी हैं. वे सामाजिक आंदोलनों और समाजशास्त्रीय विषयों पर विभिन्न प्रतिष्ठित जर्नलों में लगातार लेखन करते रहते हैं.

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    मजबूत लोकतंत्र के लिए कितनी जरूरी है कमजोर नौकरशाही

    बिहार में हुई एक तथाकथित मुठभेड़ में एक युवक की मौत के बाद भारत में पुलिस मुठभेड़ के बढ़ते मामले एक बार फिर चर्चा में हैं. क्या यह पुलिस की असंवेदनशीलता का मामला है या पुलिस के बेलगाम हो जाने का, बता रहे हैं रनधीर कुमार गौतम और केयूर पाठक.

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    छठ और चुनाव, बिहार में एक साथ दो उत्सव

    बिहार-यूपी के गांवों से निकलकर आज अपनी वैश्विक पहचान बना चुके छठ पर्व की भावना और बिहार विधानसभा चुनाव पर रंधीर कुमार गौतम और केयूर पाठक की टिप्पणी.

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    स्वदेशीकरण की राजनीति और इसके विरोधाभास

    सवाल ये भी है कि क्या हम ये मान लें कि हमारे पारंपरिक पहनावे “सौम्य” और “सभ्य” नहीं हैं? और अगर ऐसा है तो फिर हमारे सभी राजनेता उन सांस्कृतिक पहनावों से ही क्यों राजनीतिक सामाजिक जीवन में आते हैं, जिन्हें कार्यालयी जीवन में “असभ्य” और “असौम्य” माना जाता है?

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    कांग्रेस गठबंधन की राजनीति के धर्म और विज्ञान को समझती तो हरियाणा के चुनाव में सफल हो जाती

    तमाम तरह के विश्लेषकों के बीच जागरूक मतदाता के लिए चुनाव परिणाम से सीखने का अवसर छूटता जा रहा है. कुछ लोग एग्ज़िट पोल के विश्लेषण के माध्यम से ही अपनी आलोचनाओं को नए रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल शर्म और घबराहट से ऊपर उठकर जनता के मत को अपनी सफलता या असफलता में अपना निहितार्थ खोज रहे हैं. लोकतंत्र में चुनावी जीत और हार ही विश्लेषण के एकमात्र आधार नहीं होते; चुनाव में उभरती हुई नई राजनीतिक प्रक्रियाओं को समझना भी उतना ही आवश्यक है, आलोचनाओं के बावजूद.