Syed Suhail | Bengal Bulldozer Action: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गरम होता जा रहा है और फालता सीट को लेकर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है. उपचुनाव से ठीक पहले बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिसने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है.
फालता में 21 मई को वोटिंग होनी है, लेकिन उससे पहले ही टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के बीच तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है. दरअसल, हाल ही में जांच के लिए पहुंचे यूपी कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ हुए विवाद के बाद जहांगीर खान ने कहा था, “ये यूपी नहीं है, यहां बंगाल का कल्चर चलेगा. अगर आप सिंघम हैं तो मैं भी पुष्पा हूं, झुकूंगा नहीं.”
इस बयान पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने जहांगीर खान को सीधे चुनौती दे डाली. उन्होंने कहा, “अगर वो पुष्पा है तो अब उसकी जिम्मेदारी मेरी है. उसे मेरे भरोसे छोड़ दीजिए, मैं खुद उसका हिसाब करूंगा.” शुभेंदु ने यह भी कहा कि चुनाव में गड़बड़ी और मतदाताओं को डराने-धमकाने की शिकायतों की जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.
फालता सीट पर माहौल पहले ही संवेदनशील माना जा रहा है. बीजेपी का आरोप है कि पिछले कई सालों से इलाके में लोगों को स्वतंत्र रूप से वोट डालने नहीं दिया गया. शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि कई लोगों ने उन्हें बताया कि वे पिछले 10 साल से मतदान नहीं कर पाए हैं.
दूसरी ओर, टीएमसी लगातार बीजेपी पर राजनीतिक बदले की कार्रवाई करने का आरोप लगा रही है. इस बीच हुगली और कोलकाता में टीएमसी से जुड़े मामलों में कार्रवाई भी तेज हो गई है. कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में टीएमसी दफ्तर पर छापेमारी के दौरान 100 से ज्यादा आधार कार्ड और कई दस्तावेज बरामद होने के बाद विवाद और बढ़ गया है. बीजेपी ने इसे फर्जी वोटिंग और पहचान पत्र के दुरुपयोग से जोड़ते हुए बड़ा मुद्दा बना दिया है.
राज्य में पोस्ट पोल हिंसा और कटमनी (कमीशन) जैसे आरोप भी लगातार उछल रहे हैं. विभिन्न इलाकों में प्रदर्शन और छापेमारी की घटनाओं ने सियासी माहौल को और गर्म कर दिया है.
इस सबके बीच मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी लगातार एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं. अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई, सीमा सुरक्षा, कानून व्यवस्था और लंबित मामलों की जांच जैसे फैसलों ने उनकी सक्रियता को सामने रखा है. हालांकि विपक्ष इन कार्रवाइयों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है.
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फालता में होने वाला मतदान शांतिपूर्ण होगा या फिर सियासी टकराव और तेज होगा. 21 मई की वोटिंग से पहले इस सीट पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.