आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने इस मुद्दे पर दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि डॉग बाइट यानी कुत्तों द्वारा काटने की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. साथ ही अदालत ने अपने 7 नवंबर के पहले के आदेश को बरकरार रखा है. यानी अब वही नियम लागू रहेंगे जो पहले तय किए गए थे.
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि रेबीज से संक्रमित कुत्तों को खुले में नहीं छोड़ा जा सकता, उन्हें सिर्फ शेल्टर में ही रखा जाएगा. इस पूरे मामले पर ज्यादा जानकारी के लिए हम सीधा रुख करते हैं सुप्रीम कोर्ट, जहाँ से हमारी सहयोगी तेजश्री जुड़ रही हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख को बेहद सख्ती से स्पष्ट किया है. कोर्ट ने कहा कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर में देखने को मिल रही है. कोर्ट ने कई राज्यों के आंकड़े सामने रखे. राजस्थान के श्रीगंगानगर में एक महीने में ही 1,000 से ज्यादा डॉग बाइट के मामले सामने आए. वहीं तमिलनाडु में महज 4 महीनों में करीब 2 लाख मामले दर्ज किए गए.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाएं बच्चों से लेकर आम नागरिकों तक को प्रभावित कर रही हैं और यह जीवन के अधिकार और सुरक्षित तरीके से जीने के अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने यह भी कहा कि ABC (Animal Birth Control) फ्रेमवर्क 2001 से लागू है, लेकिन कई राज्यों ने इसे जमीन पर सही तरीके से लागू नहीं किया.
अब सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इन नियमों का पालन करें और इसकी रिपोर्ट भी पेश करें. कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई अधिकारी इस आदेश को लागू करने में काम कर रहा है और उसे रोका या उस पर हमला करने की कोशिश की जाती है, तो सख्त कार्रवाई होगी. यानी साफ है कि अब सरकार और प्रशासन दोनों को जवाबदेह बनाया जाएगा.