Iran-US War: ईरान-अमेरिकी जंग में गडकरी के परिवार को करोड़ों का नुकसान कैसे हो गया?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर साफ दिखाई देने लगा है. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के चलते समुद्री रास्तों पर असर पड़ा है और कई जहाज बीच समंदर में फंस गए हैं. इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे भारत के कारोबारी भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस संकट को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि इस हालात का असर उनके परिवार के कारोबार पर भी पड़ा है.

गडकरी के मुताबिक, उनके बेटे का ईरान के साथ बड़ा व्यापार है. इस बिजनेस के तहत भारत से केले ईरान भेजे जाते हैं और वहां से सेब भारत आते हैं. लेकिन मौजूदा हालात के चलते जहाजों की आवाजाही ठप हो गई, जिससे भारी नुकसान हुआ.

उन्होंने बताया कि करीब 400 कंटेनर केले रास्ते में ही खराब हो गए, जबकि ईरान से आने वाले 200 कंटेनर सेब भी पूरी तरह खराब हो गए. इससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है. सिर्फ यही नहीं, गडकरी की बहू का डिटर्जेंट का बिजनेस भी इस संकट से प्रभावित हुआ है. गडकरी ने बताया कि हर महीने करीब 100 कंटेनर डिटर्जेंट अमेरिका भेजे जाते थे. लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय हालात बिगड़े, कंटेनरों का जाना पूरी तरह बंद हो गया और पूरा कारोबार ठप हो गया.

हालांकि बाद में स्थानीय बाजार में सप्लाई शुरू कर स्थिति संभालने की कोशिश की गई, लेकिन शुरुआती झटका काफी बड़ा था. नितिन गडकरी के परिवार की कंपनियां एग्रीकल्चर, फूड प्रोसेसिंग और एथेनॉल सेक्टर में काम करती हैं. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय व्यापार रुकने से उनका पूरा बिजनेस चेन प्रभावित हुआ.

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो इसका असर सिर्फ तेल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और महंगाई पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा.
समंदर में जहाजों का फंसना इस बात का संकेत है कि वैश्विक व्यापारिक रास्ते असुरक्षित होते जा रहे हैं. भारत जैसे देशों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि यहां बड़ी मात्रा में आयात-निर्यात समुद्री रास्तों से होता है.

कुल मिलाकर, ईरान-अमेरिका के बीच टकराव अब सिर्फ राजनीतिक या सैन्य मुद्दा नहीं रह गया है. इसका असर आम लोगों और कारोबारियों की जेब पर भी साफ दिखने लगा है.