Section 377 Hearing
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डेढ़ साल का समय पर्याप्त, फिर भी कोई निर्णय नहीं...एलजीबीटीक्यू मामलों में केंद्र से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
- Friday March 20, 2026
- Reported by: भाषा, Edited by: पीयूष जयजान
याचिकाकर्ता का कहना है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों को 'असहमति वाले अप्राकृतिक यौन संबंध' के मामलों में कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता है.
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ndtv.in
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू बोले-समलैंगिकता पर जोर देकर देश की समस्याओं से हटाया जा रहा ध्यान
- Thursday September 6, 2018
- Written by: नवनीत मिश्र
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मार्कंडेज काटजू इस बात से सहमत हैं कि समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए. मगर उन्होंने फैसले को लेकर सवाल भी खडे़ किए हैं. उन्होंने धारा 377 पर आए फैसले को देश की प्रमुख समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला करार दिया है.
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ndtv.in
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समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में आज से सुनवाई
- Tuesday July 10, 2018
- ख़बर न्यूज़ डेस्क
उच्चतम न्यायालय ने 2013 में समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध घोषित कर दिया था. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में अपने एक फैसले में कहा था कि आपसी सहमति से समलैंगिकों के बीच बने यौन संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं होंगे.
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ndtv.in
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धारा 377 पर SC : अब पांच जजों की पीठ तय करेगी, समलैंगिकता को अपराध माना जाए या नहीं
- Tuesday February 2, 2016
- Edited by: Ashish Bhargava
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 पर अहम सुनवाई करते हुए मंगलवार को मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दिया है, जहां इस पर विस्तार से सुनवाई होगी।
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डेढ़ साल का समय पर्याप्त, फिर भी कोई निर्णय नहीं...एलजीबीटीक्यू मामलों में केंद्र से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
- Friday March 20, 2026
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याचिकाकर्ता का कहना है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्यों को 'असहमति वाले अप्राकृतिक यौन संबंध' के मामलों में कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता है.
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू बोले-समलैंगिकता पर जोर देकर देश की समस्याओं से हटाया जा रहा ध्यान
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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस मार्कंडेज काटजू इस बात से सहमत हैं कि समलैंगिक संबंधों को अपराध नहीं माना जाना चाहिए. मगर उन्होंने फैसले को लेकर सवाल भी खडे़ किए हैं. उन्होंने धारा 377 पर आए फैसले को देश की प्रमुख समस्याओं से ध्यान भटकाने वाला करार दिया है.
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समलैंगिकता अपराध है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट में आज से सुनवाई
- Tuesday July 10, 2018
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उच्चतम न्यायालय ने 2013 में समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों को अपराध घोषित कर दिया था. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2009 में अपने एक फैसले में कहा था कि आपसी सहमति से समलैंगिकों के बीच बने यौन संबंध अपराध की श्रेणी में नहीं होंगे.
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धारा 377 पर SC : अब पांच जजों की पीठ तय करेगी, समलैंगिकता को अपराध माना जाए या नहीं
- Tuesday February 2, 2016
- Edited by: Ashish Bhargava
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 पर अहम सुनवाई करते हुए मंगलवार को मामला पांच जजों की संविधान पीठ को भेज दिया है, जहां इस पर विस्तार से सुनवाई होगी।
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