हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत वादियों में एक ऐसा कृष्ण मंदिर है, जहां पहुंचना किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है. किन्नौर जिले के युल्ला कांडा (Yulla Kanda) में समुद्र तल से काफी ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर तक पहुंचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है. मंदिर के साथ एक झील भी है, जिससे जुड़ी कई स्थानीय मान्यताएं इसे खास बनाती हैं. जन्माष्टमी पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.
पांडवों से जुड़ी है मंदिर की मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस क्षेत्र में समय बिताया था. कहा जाता है कि युधिष्ठिर ने यहां भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान किया था. ऐसी मान्यता है कि भगवान ने उन्हें दर्शन दिए थे. इसी वजह से युल्ला कांडा को कुछ लोग स्वर्ग का द्वार भी कहते हैं. इसके अलावा, युल्ला कांडा की जन्माष्टमी का उत्सव काफी प्रसिद्ध है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, इस दिन किन्नौरी टोपी को उल्टा करके मंदिर के पास स्थित झील में डाला जाता है. ऐसी मान्यता है कि अगर टोपी बिना डूबे झील के दूसरे छोर तक पहुंच जााए तो मनोकामना पूरी होने और आने वाला साल शुभ रहने का संकेत माना जाता है. वहीं टोपी डूबने को शुभ नहीं माना जाता है. यह स्थानीय आस्था है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.
सदियों पुरानी है जन्माष्टमी की परंपरा
बता दें कि युल्ला कांडा में जन्माष्टमी उत्सव की परंपरा बुशहर रियासत के समय से चली आ रही है. राजा केहरी सिंह के समय शुरू हुई यह परंपरा आज बड़े मेले का रूप ले चुकी है. किन्नौर के अलावा हिमाचल के दूसरे इलाकों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. इस मंदिर तक पहुंचने का लोकप्रिय रास्ता युल्ला गांव से शुरू होता है. ट्रेक में पहाड़ी रास्तों से गुजरना पड़ता है, इसलिए तैयारी के सााथ जाना जरूरी है. युल्ला कांडा जाने का बेहतर समय मौसम के हिसाब से मई से नवंबर के बीच मानाा जाता है. भारी बर्फबारी के दौरान रास्ते बंद हो सकते हैं.
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दिल्ली से कैसे पहुंचे युल्ला कांडा
जानकारी के अनुसार, दिल्ली से युला खास तक सड़क मार्ग से करीब 550-600 किलोमीटर का सफर है, जिसमें लगभग 14-16 घंटे लग सकते हैं. अगर आप परिवार में माता-पिता, पत्नी और बच्चों के साथ इस जगह जाने का प्लान कर रहे हैं तो आप दिल्ली, चंडीगढ़, शिमला, नारकंडा, रामपुर, टापरी होते हुए युला खास तक जा सकते हैं. इसके बाद ट्रेक शुरू होता है. इसके अलावा, बस से दिल्ली से रिकांग पियो पहुंचनाा भी विकल्प है.
यात्रा में इन बातों का रखें ध्यान
रामपुर या टापरी में ईंधन भरवा लेना बेहतर है. पहाड़ी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क सीमित हो सकता है, इसलिए ऑफलाइन मैप डाउनलोड कर लें. ट्रेक के दौरान पानी, ग्लूकोज, ओआरएस और ड्राई फ्रूट साथ रखें. किन्नौर के ऊंचाई वाले इलाके में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए स्थानीय मौसम और प्रशासन की सलाह देखकर ही यात्रा करें.
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