Kam Pani Peene Se Kya Hota Hai: गर्मी के मौसम में पसीना ज्यादा आता है, तो प्यास भी अधिक लगती है. भारत में किए गए सर्वेक्षणों के अनुसार, लगभग 75% भारतीय किसी न किसी रूप में डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी से प्रभावित हैं. ठंड के मौसम में यह समस्या और बढ़ जाती है, क्योंकि इस समय प्यास कम लगती है और हम अनजाने में पानी पीना भूल जाते हैं. लेकिन सर्दियों में भी शरीर को उतनी ही पानी की जरूरत होती है, जितनी गर्मियों में होती है. ऐसे में सर्दियों में कम पानी पीने से शरीर में खून गाढ़ा होता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है. इसके साथ ही कब्ज, सिरदर्द, थकान, चक्कर आना और त्वचा का रूखापन जैसी समस्याएं भी होती हैं.
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2025 की Dehydration Statistics Report के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 16-21% लोग रोजाना डिहाइड्रेशन के शिकार हो रहे हैं. पानी की ये मामूली कमी भी शरीर पर बेहद गहरा असर डाल सकती है. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में मेडिसिन डिपार्टमेंट के डायरेक्टर, डॉक्टर पुलिन कुमार ने बीबीसी को बताया कि ठंडे मौसम में प्यास काफी कम हो जाती है. पसीना बहुत कम आता है, इसलिए हमें लगता है कि शरीर को पानी की जरूरत कम है.
सर्दियों में किडनी पेशाब के जरिए पानी ज्यादा बाहर निकालती है. इसके अलावा घरों और ऑफिस में चलने वाले हीटर, ड्रायर और इनडोर हीटिंग सिस्टम हवा को बहुत शुष्क बना देते हैं, जिससे त्वचा और सांस के रास्ते से पानी का नुक़सान और बढ़ जाता है.
कैसे पता चलेगा कि शरीर में पानी की कमी है?
शरीर में पानी की कमी के लक्षणों में अत्यधिक प्यास, गहरा पीला पेशाब, कम पेशाब आना, थकान, चक्कर आना, सूखा मुंह, सिरदर्द और त्वचा का लचीलापन कम होना और मांसपेशियों में ऐंठन भी हो सकती है. शरीर में पानी की कमी होने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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