आपने अक्सर देखा होगा कि कई लोगों को हर बात में सॉरी बोलने की आदत होती है. मान लीजिए आप ऑफिस में अपनी सीट पर बैठे हैं और अचानक किसी का पैर आपकी कुर्सी से टकरा जाता है. गलती सामने वाले की है, लेकिन आपके मुंह से तुरंत ओह, सॉरी निकलता है, या फिर कोई मीटिंग चल रही है, आपको एक जरूरी सवाल पूछना है, लेकिन आप अपना सवाल शुरू करने से पहले बोलते हैं सॉरी, मेरा एक छोटा सा सवाल है. क्या आपके साथ भी ऐसा होता है?
अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. बहुत से लोग हर छोटी-बड़ी बात पर बिना सोचे-समझे सॉरी बोल देते हैं. लंबे समय तक लोग इसे सिर्फ तमीज, शराफत या एक आदत मानकर टालते रहे हैं. लोगों को लगता है कि ऐसा करने वाले बहुत सीधे और नाइस होते हैं. लेकिन साइकोलॉजिस्ट कुछ और ही कहती है.
रिसर्च के मुताबिक, बार-बार सॉरी बोलना सिर्फ एक आदत नहीं है, बल्कि यह आपकी पर्सनैलिटी के बारे में बहुत कुछ बयां करता है. आइए जानते हैं कि बार-बार सॉरी बोलने के पीछे की असली वजह.
क्या है बार-बार सॉरी बोलने का साइकोलॉजी-
1. दूसरों के मूड को बहुत जल्दी भांप लेना-
साइकोलॉजी कहती है कि जो लोग बहुत ज्यादा सॉरी बोलते हैं, वे दूसरों के मूड और भावनाओं को लेकर बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं. पर्सनैलिटी और एम्पैथी पर हुई स्टडीज से पता चलता है कि ऐसे लोग अग्रेएबल' (agreeable) स्वभाव के होते हैं. यह एक बहुत अच्छी खूबी है कि आप दूसरों की भावनाओं को इतनी जल्दी समझ लेते हैं. लेकिन इसका एक नुकसान यह भी है कि जब भी माहौल थोड़ा खराब होता है, आपको बिना वजह ऐसा लगने लगता है कि इसके पीछे कहीं न कहीं आपकी ही गलती है.

सॉरी कहने का क्या होता है मतलब. (Image NDTV)
2. आपकी और दूसरों की सोच अलग है-
एक बेहद दिलचस्प रिसर्च में पुरुषों और महिलाओं की सॉरी बोलने की आदत पर कई दिनों तक नजर रखी गई. इस स्टडी में सामने आया कि महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा बार सॉरी बोला. लेकिन चौंकाने वाली बात यह थी कि ऐसा इसलिए नहीं था कि वे ज्यादा गलतियां कर रही थीं, बल्कि इसलिए था क्योंकि उनके लिए गलती का पैमाना अलग था. आसान शब्दों में कहें तो, बहुत से लोग छोटी-छोटी चीजों को भी अपनी गलती मान लेते हैं, जैसे किसी कॉल के लिए 5 मिनट लेट हो जाना, किसी से मदद मांगना या बस अपनी बात रखने के लिए थोड़ी सी जगह लेना. पुरुषों के लिए ये बातें अक्सर इतनी बड़ी नहीं होतीं कि उनके लिए माफी मांगी जाए, जबकि दूसरे लोग इसे बहुत बड़ी गलती मानकर तुरंत सॉरी कह देते हैं.
3. दूसरों की राय को अहमियत देना-
साइकोलॉजी एक्सपर्ट्स बताते हैं कि बार-बार सॉरी बोलने का सीधा संबंध इस बात से भी है कि आप खुद को कितना कीमती समझते हैं. कई बार जब किसी इंसान का आत्मविश्वास थोड़ा कम होता है, तो उसे लगता है कि उसकी वैल्यू तभी है जब सामने वाला उससे खुश रहे. यह आदत अक्सर बचपन से शुरू होती है. जिन बच्चों को ऐसे माहौल में पाला जाता है जहां उन्हें प्यार और तारीफ तभी मिलती थी जब वे 'बहुत अच्छे बच्चे' बनकर रहते थे, वे बड़े होकर भी हर किसी को खुश रखने की कोशिश करने लगते हैं. ऐसे में बार-बार सॉरी बोलना किसी का आदर करना नहीं, बल्कि खुद को दूसरों की नाराजगी या डांट से बचाने का एक तरीका बन जाता है.
4. एक बेहतरीन लीडर-
रिसर्च में एक और कमाल का ट्विस्ट सामने आया है. साइकोलॉजिस्ट्स ने पाया कि जो लोग बहुत ज्यादा सॉरी बोलते हैं, अगर वे अपनी इस आदत को थोड़ा सा बदल लें और सीधे शब्दों में अपनी बात कहें, तो लोग उन्हें बहुत पसंद करते हैं. एक स्टडी में देखा गया कि जिन लोगों ने जरूरत से ज्यादा माफी मांगना बंद कर दिया और उसकी जगह पूरे भरोसे के साथ अपनी बात रखी, उन्हें लोग ज्यादा काबिल और समझदार मानने लगे. यहां तक कि सोशल मीडिया पर भी ऐसे लोगों को ज्यादा पसंद किया गया. इसका मतलब यह है कि आपके अंदर एक बेहतरीन लीडर बनने के सारे गुण मौजूद हैं, बस आपको अपनी इस सॉरी बोलने की आदत को थोड़ा सा रीकैलिब्रेट करने की जरूरत है.
सॉरी की जगह क्या कहें?
अगर आपसे सच में कोई गलती हुई है, तो सॉरी कहना बहुत अच्छी बात है. लेकिन अगली बार जब आपके मुंह से ऑटोपायलट मोड पर सॉरी निकलने लगे, तो एक सेकंड के लिए रुकिए और खुद से पूछिए क्या वाकई मेरी गलती है, या मैं बस सामने वाले को कम्फर्टेबल फील कराने के लिए ऐसा कर रहा हूं? आप एक छोटा सा बदलाव कर सकते हैं. जैसे, अगर आप किसी मीटिंग में लेट पहुंचे हैं, तो यह कहने के बजाय कि सॉरी मैं लेट हो गया, आप कह सकते हैं मेरा इंतजार करने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया. यह एक छोटा सा बदलाव न सिर्फ आपकी आदत को बदलेगा, बल्कि आपकी पर्सनैलिटी को भी दूसरों के सामने मजबूत और कॉन्फिडेंट बनाकर पेश करेगा.
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