कॉर्पोरेट दुनिया में आज के समय में सिर्फ काम ही नहीं, बल्कि आपकी पर्सनैलिटी भी बहुत मायने रखती है. कई बार ऐसा होता है कि आपके पास टैलेंट तो पूरा है, लेकिन सही तरीके से खुद को पेश न कर पाने की वजह से लोग आपको हल्के में लेने लगते हैं. ऐसा ही कुछ हुआ नोएडा की रहने वाली 25 वर्षीय कोमल के साथ.
नोएडा की एक बड़ी कॉर्पोरेट कंपनी में काम करने वाली कोमल का कहना है कि एक वक्त था जब ऑफिस में लोग उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते थे. उनको हर बात में टोक दिया जाता है था, कोई बोलता था, तुम्हारी उम्र ही अभी क्या है, तुम बच्ची हो, तुमसे नहीं हो पाएगा वगैरह- वगैरह. जिससे उनका कॉन्फिडेंस लगातार गिर रहा था. लेकिन कोमल ने हार नहीं मानी. उन्होंने खुद को बदलने का फैसला किया और आज वह ऑफिस में सबकी पसंदीदा बन चुकी हैं.
जब कोमल को अहसास हुआ कि बदलाव है जरूरी-
कोमल बताती हैं, शुरुआत में मुझे लगता था कि अगर मैं अपना काम अच्छे से कर रही हूं, तो वही काफी है. लेकिन जल्द ही मुझे समझ आ गया कि कॉर्पोरेट लाइफ में आपकी बॉडी लैंग्वेज और बात करने का तरीका भी उतना ही जरूरी है. लोग मेरी बातों को बीच में ही काट देते थे या मुझे बहुत कमतर आंकते थे. इसके बाद मैंने ठान लिया कि मुझे अपनी इस इमेज को बदलना है.

खुद को कैसे ग्रूम करें कोमल की कहानी से सीखें. (Image Unsplash)
कोमल ने अपनी पर्सनैलिटी बदलने के लिए अपनाए ये 3 तरीके-
1. बातचीत के तरीके-
कोमल ने सबसे पहले अपनी आवाज और बोलने की स्पीड पर काम किया. वह बताती हैं, पहले मैं बहुत जल्दी-जल्दी बोलती थी, जिससे लोगों को लगता था कि मैं घबरा रही हूं. मैंने धीरे और साफ बोलना शुरू किया. अपनी बात को घुमाने के बजाय पॉइंट-टू-पॉइंट रखना सीखा.
2. बॉडी लैंग्वेज-
कहते हैं कि आपकी जुबान से पहले आपकी बॉडी लैंग्वेज बात करती है. कोमल ने इस बात को गहराई से समझा. उन्होंने झुककर बैठने या कंधे झुकाकर खड़े होने की आदत को बदला. ऑफिस में लोगों से बात करते समय आई-कॉन्टैक्ट बनाए रखना और चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान रखना उनकी नई आदत बन गई. इससे उनकी पर्सनैलिटी में एक अलग ही ठहराव और लीडरशिप क्वालिटी दिखने लगी.
3. कॉन्फिडेंस-
कॉन्फिडेंस रातों-रात नहीं आता. कोमल ने इसके लिए खुद को अंदर से तैयार किया. वह ऑफिस के प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा रिसर्च करने लगीं ताकि जब भी वह कुछ बोलें, तो उनके पास पुख्ता जानकारी हो. जब आपके पास नॉलेज होती है, तो कॉन्फिडेंस अपने आप आ जाता है.
कोमल का कहना है जब मैंने खुद को सीरियसली लेना शुरू किया, तो दुनिया ने भी मुझे सीरियसली लेना शुरू कर दिया. आज वही लोग जो मुझे इग्नोर करते थे, मुझसे सलाह लेने आते हैं.
यह लेख हमारे एक पाठक का नीजि अनुभव है. इसमें व्यक्त विचार उनके अपने हैं.
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