सोशल मीडिया पर हर कुछ महीनों में कोई न कोई नया स्किनकेयर हैक वायरल हो जाता है. कभी कोई 90 सेकंड में चेहरे पर कई तरह के प्रोडक्ट्स लगाने का वीडियो शेयर करता है, तो कभी कोई शादी से पहले आंखों के नीचे कच्चा आलू रगड़ने या चेहरे पर बर्फ लगाने की सलाह देता है. ये ट्रिक्स देखने में भले ही अच्छी लगती हों, लेकिन त्वचा के लिए हमेशा फायदेमंद नहीं होती. स्किन एक्सपर्ट के मुताबिक, उनके पास ऐसे लोग आते हैं जिन्हें अचानक रैशेज, एलर्जी या मुंहासों की समस्या होने लगती है. जब वजह पूछी जाती है, तो पता चलता है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी स्किनकेयर हैक को आजमाया था. कुछ लोगों की त्वचा पर तुरंत दाने निकल आते हैं, जबकि कुछ की स्किन पहले से ज्यादा संवेदनशील हो जाती है.
टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एस्थेटिक सर्जन और ब्रिलियंस कॉस्मोकेयर के संस्थापक डॉ. अशोक पटेल ने बताया कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर स्किनकेयर ट्रेंड को आंख बंद करके फॉलो करना सही नहीं है. कई ट्रेंड्स वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं होते और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
घर पर केमिकल पील करना
नींबू का रस, बेकिंग सोडा और एप्पल साइडर विनेगर जैसी चीजों को मिलाकर घर पर केमिकल पील करने के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, लेकिन हर त्वचा की जरूरत अलग होती है. त्वचा विशेषज्ञ आपकी स्किन टाइप को देखकर सही मात्रा और तरीका तय करते हैं, जबकि रसोई में मौजूद ये चीजें ऐसा नहीं कर सकतीं. इनका गलत इस्तेमाल त्वचा में जलन, दाग-धब्बे और यहां तक कि निशान भी छोड़ सकता है. इसलिए ग्लास स्किन पाने के चक्कर में ऐसे घरेलू केमिकल पील्स आजमाने से बचना चाहिए.
एक साथ बहुत सारे एक्टिव इंग्रेडिएंट्स लगाना
आजकल कई लोग एक ही रूटीन में रेटिनॉल, विटामिन C, AHA, नियासिनामाइड और अलग-अलग एसिड वाले टोनर इस्तेमाल करने लगते हैं, क्योंकि सोशल मीडिया पर ऐसा करते हुए देखा जाता है, लेकिन त्वचा को एक साथ इतने सारे एक्टिव इंग्रीडिएंट्स की जरूरत नहीं होती. सही प्रोडक्ट्स को धीरे-धीरे और सही तरीके से इस्तेमाल करना ज्यादा जरूरी है. एक साथ बहुत कुछ लगाने से त्वचा लाल हो सकती है, छिलने लग सकती है और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंच सकता है.
आईने से ज्यादा फिल्टर पर भरोसा करना
ब्यूटी फिल्टर्स ने लोगों की सोच बदल दी है कि परफेक्ट स्किन कैसी दिखनी चाहिए. इन फिल्टर्स में त्वचा के रोमछिद्र यानी पोर्स, टेक्सचर और छोटी-मोटी कमियां पूरी तरह गायब हो जाती हैं. इसी वजह से कई लोग अपनी सामान्य त्वचा को भी खराब समझने लगते हैं और ऐसी समस्याओं का इलाज करवाना चाहते हैं, जो वास्तव में समस्या होती ही नहीं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि फिल्टर वाली तस्वीरों के बजाय अपनी असली त्वचा को समझना और उसकी जरूरतों के अनुसार देखभाल करना ज्यादा जरूरी है.
सिर्फ SPF वाले मेकअप प्रोडक्ट्स पर भरोसा करना
आजकल कई टिंटेड मॉइस्चराइजर, फाउंडेशन और फेस पाउडर अपने लेबल पर SPF होने का दावा करते हैं, लेकिन केवल इन्हीं प्रोडक्ट्स के भरोसे रहना सही नहीं माना जाता. दरअसल, लैब में जिस मात्रा में इनकी जांच की जाती है, उतनी मात्रा में लोग इन्हें चेहरे पर नहीं लगाते. इस वजह से त्वचा को उतनी सुरक्षा नहीं मिल पाती जितनी दावा की जाती है. लंबे समय तक ऐसा करने पर सन डैमेज और जिद्दी पिग्मेंटेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए मेकअप प्रोडक्ट्स के साथ अलग से सनस्क्रीन लगाना बेहतर माना जाता है.
बर्फ से फेस मसाज और ठंडी थेरेपी
सोशल मीडिया पर चेहरे पर बर्फ रगड़ने का ट्रेंड काफी लोकप्रिय है. दावा किया जाता है कि इससे पोर्स छोटे हो जाते हैं और चेहरा ज्यादा फ्रेश दिखता है, लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक, पोर्स वास्तव में छोटे नहीं होते क्योंकि उनमें सिकुड़ने वाली मांसपेशियां नहीं होती. बर्फ लगाने से त्वचा और आसपास की रक्त वाहिकाएं कुछ समय के लिए सिकुड़ जाती हैं, जिससे पोर्स कम नजर आ सकते हैं. हालांकि, संवेदनशील या पहले से प्रभावित त्वचा पर ज्यादा बर्फ लगाने से लालिमा, जलन और परेशानी हो सकती है. अगर चेहरे को ठंडक पहुंचानी है, तो कभी-कभी ठंडे कपड़े या कूल कंप्रेस का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे रोजाना की स्किनकेयर रूटीन का जरूरी हिस्सा मानना सही नहीं है.
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