Sita Ram Diwan Chand Special Chole Bhature In Paharganj Reopens: दिल्ली की सुबह हो और प्लेट में गरमागरम फूले हुए भटूरे न हों तो स्वाद कुछ अधूरा सा लगता है. खासकर जब बात पहाडगंज वाले सीताराम दीवान चंद की हो. पिछले 5 दिनों से इस मशहूर दुकान पर सन्नाटा पसरा था क्योंकि कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत ने बड़े बड़े जायकेदारों के चूल्हे ठंडे कर दिए थे. लेकिन अब छोले भटूरे के दीवानों के लिए एक अच्छी खबर है. 20 फीसदी कोटे के साथ ही सही लेकिन सीताराम के यहां फिर से कड़ाही चढ़ गई है और भटूरों की खुशबू गलियों में तैरने लगी है.
1950 से अब तक... बस नाम ही काफी है
सीताराम दीवान चंद की कहानी साल 1950 से शुरू होती है. यह महज एक दुकान नहीं बल्कि दिल्ली की विरासत है. यहां के भटूरों की खासियत यह है कि ये मैदे के भारीपन के बजाय काफी हल्के और जालीदार होते हैं क्योंकि इनमें पनीर की स्टफिंग का एक खास टच होता है. इनके छोले मसालेदार तो हैं ही लेकिन उनका टेक्सचर और ऊपर से डलने वाला सीक्रेट मसाला इसे बाकी जगहों से अलग बनाता है. 5 दिन की बंदी के बाद जब आज दुकान खुली तो मालिक पुनीत कोहली के चेहरे पर संतोष था. हालांकि वह कहते हैं कि सिलेंडर की कमी की वजह से अभी मांग का सिर्फ 50 फीसदी ही बना पा रहे हैं, लेकिन शुरुआत होना ही बड़ी बात है.
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खा सकेंगे सिर्फ ये लोग
क्योंकि सप्लाई अभी 50 फीसदी ही है, तो इस 70 साल पुराने जायके को अगर आप चखना चाहते हैं तो आपको समय से पहुंचना होगा. पहले जहां रेस्तरां को 5 सिलेंडर मिल रहे थे वहीं अब महज दो मिले हैं. इसी वजह से 50 फीसदी ही मांग पूरी हो रही है. ऐसे में अगर आप जायका चखना चाहते हैं तो शुरुआत के 50 लोगों में शामिल होने से आपके ये मिल सकता है.

बोस्टन से आए सिद्धार्थ ने चखा पहला निवाला
स्वाद की दीवानगी ऐसी है कि बोस्टन से आए सिद्धार्थ लूथरा जैसे लोग भी यहां खिंचे चले आते हैं. सिद्धार्थ पिछली बार आए तो मायूस होकर लौटे थे क्योंकि दुकान बंद थी लेकिन आज जब उन्होंने पनीर वाले भटूरे और चटपटे छोलों का निवाला लिया तो उनकी थकान मिट गई. सच तो यह है कि दिल्ली में छोले भटूरे सिर्फ एक नाश्ता नहीं बल्कि एक इमोशन है. भले ही सिलेंडर की कमी ने मेन्यू छोटा कर दिया हो या सप्लाई कम हो लेकिन सीताराम के शटर उठते ही दिल्ली वालों की जान में जान आ गई है.

सीक्रेट मसाला और पहाडगंज का जादू
बहुत कम लोग जानते हैं कि सीताराम के छोलों में एक ऐसा मसाला डाला जाता है जिसकी रेसिपी आज भी एक राज है. यह मसाला करीब 70 सालों से उसी तरह बनाया जा रहा है जैसे इसे शुरू में बनाया गया था. इसी मसाले की वजह से सीताराम के छोले इतने खास हैं. और पहाडगंज की वो गलियां... वहां बैठकर खाना एक अलग ही अनुभव है. वहां की रौनक और सीताराम के छोले भटूरे... यह एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है. अगर आप भी प्लान बना रहे हैं तो थोड़ा जल्दी निकलिएगा क्योंकि कोटा कम होने की वजह से स्टॉक जल्दी खत्म हो सकता है.
कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत के कारण 5 दिनों तक बंद रहने के बाद आख़िरकार सीताराम छोले भटूरे की दुकान खुल गई है. हालांकि सप्लाई अभी भी मांग से कम है, लेकिन 20% कोटे के आदेश ने दुकानदारों को बड़ी राहत दी है. देखिए रवीश रंजन शुक्ला की यह खास रिपोर्ट#FoodCrisis #Paharganj… pic.twitter.com/SM8j7Hz3ID
— NDTV India (@ndtvindia) March 18, 2026
अलग-अलग रेस्तरां पर अलग अलग असर
कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत का दिल्ली के कई नामी रेस्टोरेंट पर असर हुआ. कई नामी रेस्तरां ने अपने मेन्यू को छोटा तक कर दिया क्योंकि वे सभी आइटम तैयार नहीं कर पा रहे थे. सीताराम के अलावा ओम छोले भटूरे पर भी पड़ा है जबकि कनॉट प्लेस के मशहूर रेस्टोरेंट ने भी अपने मेन्यू को छोटा किया है.
20 फ़ीसदी कामर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरु
कामार्शियल सिलेंडर की सप्लाई कुल सप्लाई का बीस फ़ीसदी देने की शुरुआत दिल्ली सरकार ने कर दी है.इसमें प्राथमिकता के आधार पर ये सिलेंडर दिए जा रहे हैं मसलन शैक्षिक संस्थान, अस्पताल, रेलवे और हवाई अड्डे के पहली प्राथमिकता, दूसरी प्राथमिकता सरकारी संस्थान और कैंटीन, तीसरी प्राथमिकता रेस्तरां और भोजनालय चौथी प्राथमिकता होटल और गेस्ट हाउस पांचवीं प्राथमिकता डेयरी और बेकरी छठी प्राथमिकता कैटरर्स और बैंजेट हॉल सातवीं प्राथमिकता ड्राई क्लीनिंग और पैकेजिंग इकाइयां और खेल सुविधाएं और स्टेडियम (प्राथमिकता 8). वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति मुख्य रूप से 19-किलोग्राम सिलेंडर प्रारूप में की जाएगी.
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