The Seven Stages of Ishq: कोई कहता है मुझे मोहब्बत हो गई है, कोई कहता है मुझे इश्क हो गया है. लेकिन क्या दोनों एक ही हैं. नहीं. तो क्या फर्क है दोनों में? इसे समझने का एक तरीका हो सकता है इस बारे में सूफियों ने क्या कहा है. NDTV क्रिएटर्स मंच पर सिंगर प्रिया मलिक ने इन सात पड़ावों के बारे में समझाया.
एनडीटीवी क्रिएटर्स मंच (NDTV Creators' Manch) के दूसरे सीज़न में साहित्य और कला के क्षेत्र से बड़े-बड़े नामों ने शिरकत की. प्रिया मलिक का नाम भी इस लिस्ट में शामिल रहा. प्रिया मलिक ने स्टेज पर ऐसा समा बांधा कि सैंकड़ों की भीड़ होने के बावजूद दर्शक दीर्घा में कोई शोर नहीं था. सभी एनडीटीवी क्रिएटर्स मंच पर प्रिया मलिक की कविताओं को सुनकर मुग्ध थे. इसी दौरान प्रिया ने चाय पर भी शायरी की. उन्होंने रिश्ते, प्रेम, इश्क और मुहब्बत पर भी इस अंदाज-ए-बयां से कविता पढ़ी कि समा बंध गया था.
बहरहाल, लौटकर आते हैं प्यार और इश्क पर. कवयित्री ने बताया कि प्यार और इश्क में क्या अंतर है और वो 7 पड़ाव कौन से हैं जिन्हें पार करने के बाद ही इश्क का मुकाम हासिल किया जा सकता है.
प्यार से इश्क- सात पड़ाव | The Seven Stages of Ishq
सूफियों के मुताबिक इश्क तक पहुंचने के लिए आपको 6 पड़ाव पार करने होते हैं. तब जाकर कहीं इश्क नसीब होता है.
1. दिलकशी यानी आकर्षण
आप किसी को देखते हैं, वो अच्छा लगता है. कई बार इसे लोग Infatuation समझ लेते हैं, लेकिन ये उससे पहले का चरण है. इसमें कोई भावनात्मक लगाव नहीं होता है, बस कोई मनमोहक लगता है.
2. उन्स यानी Infatuation
अभी आप इश्क से कोसों दूर हैं. ये वो पड़ाव है जिसे अक्सर लोग मोहब्बत समझ लेते हैं. इसे आप आसक्ति कह सकते हैं.
3. अकीदत यानी भरोसा
यहां से भावनाएं जोर मारने लगती हैं. ये बड़ी चीज है कि आपको किसी पर यकीन हो जाए.
4. मोहब्बत
फिर बारी आती है प्यार, मोहब्बत की. आपका मन किसी ने मोह लिया है. शारीरिक आकर्षण तो है ही अब मन भी जुड़ गया है.
5. इबादत
अब प्यार में पागलपन का पहला चरण शुरू हो रहा है. आप मोहब्बत की दहलीज पार कर चुके हैं. मामला उससे आगे बढ़ चला है.
6. जुनून
वो सुना है ना कि 'कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है'. कुमार विश्वास की ये पक्तियां इस स्टेज को समझाती हैं.
7. मौत
सचमुच की मौत नहीं. 'मैं' का मर जाना, 'खुदी' का मर जाना. यही वो पड़ाव है, जिसे आप इश्क कहते हैं. अब 'मैं' से 'हम' का सफर पूरा हो गया है.
अब आप तय कर लीजिए कि आप किस स्टेज पर हैं. हालांकि सूफियों के प्रेम और दुनियावी प्रेम में फर्क है. अक्सर सूफी ऊपर वाले से प्रेम कर बैठते हैं. उनके लिए पिया भी वही है और मासूक भी वही. जब अमीर खुसरो कहते हैं- छाप तिलक सब छीनी रे, मोसे नैना मिलाय के, तो वो किसी महबूब से नहीं उस ऊपर वाले से बात कर रहे हैं. चलिए ये गाना आपके लिए छोड़ जाते हैं...सुनिए इसे-
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