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वो जगह जहां भगवान कृष्ण ने त्यागे थे प्राण, ये थे उनके अंतिम शब्‍द, कहां है ये पावन तीर्थ

क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण की एक व्यक्ति ने तीर मारकर हत्या की थी. आखिर वो स्‍थान कहां था जहां श्रीकृष्‍ण ने अंतिम सांस ली, जानें इसके बारे में विस्‍तार से. 

वो जगह जहां भगवान कृष्ण ने त्यागे थे प्राण, ये थे उनके अंतिम शब्‍द, कहां है ये पावन तीर्थ

भगवान कृष्ण द्वापर युग के अंत में मानव रूप में धरती पर आए थे. हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण को भगवान विष्‍णु का अवतार माना गया है. अपने जीवनकाल में श्रीकृष्‍ण ने कई लीलाएं कीं. मथुरा, वृंदावन से लेकर कुरुक्षेत्र की भूमि में गीता ज्ञान तक, कृष्‍ण लीलाओं की अनगनित कथाएं आज भी सुनाई जाती हैं. परम प्रतापी, तेजस्‍वी, अलौकिक और ईश्‍वर के अवतार श्रीकृष्‍ण की मृत्‍यु के बारे में बहुत कम लोगों को पता है. क्या आप जानते हैं कि भगवान कृष्ण की एक व्यक्ति ने तीर मारकर हत्या की थी. आखिर वो स्‍थान कहां था जहां श्रीकृष्‍ण ने अंतिम सांस ली, जानें इसके बारे में विस्‍तार से. 

भगवान कृष्ण की मृत्‍यु का रहस्‍य 

भगवान कृष्ण ने जब धरती पर लीला समाप्‍त की और उनके वैकुंठ प्रस्थान करने का समय आया, तब भगवान कृष्ण द्वारका नगरी में थे. उस समय तक द्वापर युग में व्‍याप्‍त अधर्म का वे अंत तक चुके थे. श्रीकृष्ण ने वन जाकर ध्यान और तपस्या में लीन होने का निर्णय किया. वे वन की ओर गए और एक पेड़ के उपर बैठ गए. उनके पैर पेड़ की टहनी के दोनों ओर लटके थे. तभी एक बहेलिया शिकार करने उसी वन में आया. 

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पत्तों के बीच भगवान कृष्ण के पैर देखकर उसे लगा कि शायद ये हिरण छिपा बैठा है. उसने बाण चला दिया. वह बाण सीधे श्रीकृष्ण के पैरों में जा लगा. भगवान मुर्छित हो गए. तब बहेलिया ने देखा कि उससे कितनी बड़ी भूल हो गई है. वह वहां दौड़कर आया और क्षमा मांगने लगा. भगवान ने उसे माफ कर दिया और कहा कि उनका पृथ्वी से जाना निश्चित है और वह उनके जाने का साधन बना है. श्रीकृष्‍ण ने बताया कि वे त्रेतायुग में राम थे और वह शिकारी बाली थी. तब मेरे कारण तुम्हारी जान गई थी, उसी वजह से तुमने मुझे तीर मारा और इससे मेरी मृत्यु होगी. ये कहते हुए कृष्ण ने प्राण छोड़ दिए थे. 

किस जगह श्रीकृष्‍ण ने प्राण त्‍यागे थे 

जिस जगह श्रीकृष्‍ण ने प्राण त्‍यागे थे, उस समय वह वन था, पर आज इसे भालका तीर्थ के नाम से जाता जाता है. ये जगह सौराष्ट्र के वेरावल में है, जो गुजरात में पश्चिमी समुद्र तट पर है. अब यहां भालका तीर्थ नाम से एक मंदिर है. क्‍योंकि जिस जारा नाम के शिकारी के तीर से भगवान के प्राण गए थे, वो यहीं आराधना करने लगा था. इसके बाद यहां मंदिर बनाया गया था.

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कैसे पहुंचे भालका तीर्थ 

भालका तीर्थ जाना है तो यह गुजरात के सोमनाथ मंदिर के करीब ही है. जो लोग सोमनाथ मंदिर जाते हैं, वे वहां से इस तीर्थ पर आराम से पहुंच सकते हैं. यह तीर्थ सोमनाथ मंदिर से 4 किलोमीटर की दूरी पर है. इस तीर्थ में भगवान श्रीकृष्ण की मुस्कुराती प्रतिमा है. पास में वह बहेलिया बैठा है, जिसके बाण ने कृष्ण के बाएं पैर को भेदा था. मंदिर में आज भी हजारों साल पुराना वह पीपल का वृक्ष है, जिस पर श्रीकृष्ण उस घटना के समय विश्राम कर रहे थे. 

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग - भालका तीर्थ पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा राजकोट है. 
रेल मार्ग - सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन वेरावल स्टेशन है. 
सड़क मार्ग - भालका तीर्थ सड़क मार्ग से पहुंचना आसान है क्योंकि यह सोमनाथ से थोड़ी ही दूरी पर है. 
मंदिर का समय -  सुबह 6 बजे से रात 9 बजे तक. 

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