जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 1 नवंबर 2025 को चौथी कक्षा की 9 वर्षीय छात्रा अमायरा मीणा की स्कूल की चौथी मंजिल से गिरकर मौत हो गई है. हाल ही में घटना से ठीक पहले का नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें बच्ची मानसिक प्रताड़ना और बुलिंग (Bullying) का शिकार होती दिख रही है. अमायरा की मौत ने एक बार फिर बच्चों की मानसिक सेहत, स्कूल के माहौल और बुलिंग (Bullying) जैसे गंभीर मुद्दों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. हर माता-पिता को अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को गंभीरता से लेना चाहिए. कई बार बच्चे बुलिंग का शिकार होते हैं, लेकिन डर, शर्म या झिझक की वजह से इसके बारे में किसी को बता नहीं पाते या खुलकर बात नहीं कर पाते. ऐसे में हर माता-पिता को कुछ संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
स्कूल जाने से अचानक डरने लगे
अगर, आपका बच्चा पहले खुशी-खुशी स्कूल जाता था, लेकिन अब बार-बार स्कूल न जाने के बहाने बनाने लगा है, तो इसे सिर्फ जिद या फिर ऐसे ही छोटी सी बात समझकर नजरअंदाज नहीं करें. अक्सर बुलिंग का शिकार बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं, क्योंकि बच्चे के मन में डर बैठ जाता है कि उसे फिर से पहले जैसे परेशान किया जाएगा.
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बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव
अगर, आपके बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाए. जैसे- बच्चा पहले की तुलना में चुपचाप रहने लगे, गुस्सा ज्यादा करने लगे या परिवार से दूरी बनाने लगे, तो यह भावनात्मक परेशानी का संकेत हो सकता है. ऐसे बदलावों के पीछे स्कूल में होने वाले नकारात्मक अनुभव भी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति में बच्चे के बात करने की कोशिश करें और चीजों को सही करने का प्रयास करें.
आत्मविश्वास में कमी
अगर बच्चा बार-बार कहने लगे, ‘मुझे कोई पसंद नहीं करता', ‘मैं अच्छा नहीं हूं', ‘मेरे कोई दोस्त नहीं हैं' या ‘सब मुझसे नफरत करते हैं', तो इन बातों को हल्के में न लें. बच्चा बार-बार खुद को कमजोर, बेकार या दूसरों से कम समझने लगे तो इस पर ध्यान देना जरूरी है. बुलिंग बच्चों के आत्मसम्मान पर गहरा असर डाल सकती है.
बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की शिकायत
कई बच्चे मानसिक तनाव को शब्दों में नहीं बता पाते. ऐसे में तनाव शारीरिक लक्षणों के रूप में सामने आता है. अगर, डॉक्टर कोई स्पष्ट कारण नहीं बता पा रहे हैं, तो बच्चे की भावनात्मक स्थिति को भी समझने की कोशिश करें. बच्चे को बार-बार सिरदर्द या पेट दर्द की शिकायत हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करें.
नींद, भूख और पसंदीदा चीजों में बदलाव
बुलिंग का असर बच्चे की दिनचर्या पर भी दिखाई देता है. बार-बार बुरे सपने आना, ठीक से नींद न आना, भूख कम या ज्यादा लगना, पसंदीदा खेल या हॉबी में रुचि खत्म हो जाना और स्कूल से लौटने के बाद अपने दिन के बारे में बात न करना चिंता का विषय हो सकता है.
माता-पिता क्या करें?
- रोजाना बच्चे से खुलकर बात करें.
- उसकी बात बिना टोके और बिना जज किए सुनें.
- स्कूल और शिक्षकों के संपर्क में रहें.
- बच्चे को भरोसा दिलाएं कि वह अकेला नहीं है.
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