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धान में कीटों को कैसे नियंत्रित करें? धान की फसल में नमक डालने से क्या होता है, जान‍िए यहां

धान की फसल को कीटों से कैसे बचाएं? धान पर कीटों का खतरा हमेशा बना रहेता है. इसके अलावा कंडुआ रोग, तना वेधक रोग, खैरा रोग और ऐसे बाकी रोगों से धान की फसल को बचाकर रखना बहुत मुश्किल होता है. ऐसे में पत्ती लपेटक कीट आपकी फसल बचाने में मदद कर सकती है.

धान में कीटों को कैसे नियंत्रित करें? धान की फसल में नमक डालने से क्या होता है, जान‍िए यहां
फसल को कीड़े से बचने के लिए किस क्या करता है?
Photo Credit: NDTV

धान की फसल में कीड़े और रोग लगने की वजह से पैदावार पर असर पड़ता है. इससे फसल को बचाने के लिए जिला कृषि अधिकारी ने कुछ सुझाव दिए हैं. मौसम के अनुकूल होने की वजह से धान पर कीटों का खतरा बढ़ जाता है. इस समय पर फसल की सही देखभाल के साथ-साथ, अगर  जरूरत हो तो दवाई भी डालें. जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि धान की फसल में कई तरह के कीट लग सकते है. इनमें से एक जड़ सूडी भी है जो की धान की जड़ो में जा कर उसे नुकसान पहुंचा सकती है.  धान की जड़ो को जड़ सूडी से बचने के लिए करटाप हाइड्रेक्लोराइड चार प्रतिशत दानेदार रसायन 25 कि.ग्रा. का छिड़काव करें या फिर सिंचाई करते वक्त पानी में कलोरोपाइरीफास 20 कि.ग्रा. 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से दाल दें.

धान की फसल में नमक डालने से क्या होता है?

धान की फसल या खेत में साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड) डालने से शुरुआती समय में थोड़ी देर के लिए पौधा हरा-भरा या कीड़ों से मुक्त हो सकता है, लेकिन यह फसल और मिट्टी दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक है. वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ इसकी सलाह ब‍िल्‍कुल नहीं देते हैं, अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो इसे तुरंत बंद कर दें. 

पत्ती लपेटक कीट

धान को जड़ सूडी कीड़े और बाकी रोगों से बचाने के लिए क्लोरोपाइरीफास 20 Percent  ईसी 2.5 लीटर या फिर करटाप हाइड्रेक्लोराइड 4 Percent दानेदार रसायन 25 कि.ग्रा.बुरक दें.

कंडुआ रोग

इस रोग में धान के बालियों में दानों की जगह पर हलके पिले रंग का पाउडर जैसा दिखने वाला फफूंद लग जाता है. इस रोग से फसल को बचाने के लिए बालियों को निकलने से पहले ही 25 प्रतिशत ईसी 500 मिली या प्रोपीनेब 70 प्रतिशत की 500 से 700 ग्राम को 500-600 लीटर पानी में मिलाकर उसका छिड़काव कर दें.

कीटों के प्रकोप से बचाएं धान की फसल

कीटों के प्रकोप से बचाएं धान की फसल

तना वेधक रोग

इस रोग में सूडियां धान के तनों को नुक्सान पहुँचती है. इस वजह से पौधे की उपज रुक जाती है. इस रोग से पौधे को बचने के लिए एक हेक्टेयर खेत में पांच फेरोमोन ट्रेप लगाएं. 

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खैरा रोग

यह रोग धान के पौधे में जिंक की कमी से होता है. इसमें पत्तियां पीली हो जाती हैं और पत्तियों पर कत्थई रंग के धब्बे पडने लगते हैं. इसको ठीक करने के लिए पांच किलोग्राम जिंक सल्फेट को 20 किलोग्राम यूरिया को 800-1000 लीटर पानी में मिला कर एक हेक्टेयर खेत में डालें.

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