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नोएडा की इस महिला ने बालकनी को बना दिया प्रकृति का घर, हर सुबह 200 चिड़ियों के साथ होती है शुरुआत

नोएडा की एकता नाहर को पक्षियों से बहुत लगाव है. उन्होंने अपने घर की बालकनी पर पक्षियों के आशियाना बना दिया है. अब एकता नाहर की सुबह किसी अलार्म या तेज धूप से नहीं, बल्कि 200 से ज्यादा चहचहाते पक्षियों की आवाज से होती है.

नोएडा की इस महिला ने बालकनी को बना दिया प्रकृति का घर, हर सुबह 200 चिड़ियों के साथ होती है शुरुआत
बालकनी बनी पक्षियों का स्वर्ग
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नोएडा की रहने वाली कलाकार एकता नाहर की सुबह एक अलग ही दुनिया से शुरू होती है. एकता नाहर की सुबह किसी अलार्म या तेज धूप से नहीं, बल्कि 200 से ज्यादा चहचहाते पक्षियों की आवाज से होती है. हर दिन उनके घर की बालकनी में गौरैया, तोते, कोयल, सिल्वरबिल और अन्य कई पक्षी आते हैं. कोई रेलिंग पर बैठता है, कोई उनके 300 से ज्यादा गमलों के बीच फुदकता है, तो कुछ पक्षी उनके हाथों से ही दाना खा लेते हैं.

नोएडा में 10वीं मंजिल पर बनाया बर्डहाउस

एकता नोएडा में 10वीं मंजिल पर रहती हैं. उन्होंने घर की बालकनी में चिड़ियों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल जगह बनाई. उन्होंने छोटे-छोटे बर्डहाउस बनाए, गमलों को अपने हाथों से रंगा और पुराने व इस्तेमाल किए गए सामान से पक्षियों के लिए फीडर और बैठने की जगह तैयार की. अब यहां पक्षी सिर्फ खाने के लिए नहीं आते थे, बल्कि इसलिए भी आते थे क्योंकि वह जगह उन्हें सुरक्षित और आरामदायक महसूस कराती थी.

हर रोज आते हैं 200 पक्षी

इंस्टाग्राम हैंडल यूनिक फार्मिंग पर एक वीडियो शेयर किया गया है, जिसमें दिखाया गया कि एकता नाहर ने कैसे अपनी बालकनी को पक्षियों का घर बना दिया. आज उनकी बालकनी एक छोटे से प्राकृतिक आशियाने में बदल चुकी है, जहां रोज करीब 200 पक्षी आते हैं. एकता को पक्षियों से लगाव 2022 में मसूरी की एक फैमिली ट्रिप के दौरान हुआ. वहां पूरे दिन पक्षियों की आवाजें सुनकर उन्हें एहसास हुआ कि शहरों में यह प्राकृतिक संगीत कितना कम हो गया है. इसके बाद ही उन्होंने पक्षियों के लिए एक आशियाना बनाने का फैसला किया. इसके बाद 2023 में उन्होंने अपनी बालकनी में पौधे लगाए, पानी के बर्तन रखे और अलग-अलग अनाज डालने शुरू किए.

करीब साढ़े तीन महीने तक उनकी बालकनी में एक भी पक्षी नहीं आया, लेकिन फिर एक सुबह उन्हें वह आवाज सुनाई दी, जिसका उन्हें लंबे समय से इंतजार था. एक गौरैया की चहचहाहट. उनके इलाके में गौरैया दिखे हुए 10 साल से भी ज्यादा समय हो चुका था. इसके बाद धीरे-धीरे पक्षियों का आना बढ़ने लगा. आज, करीब साढ़े तीन साल बाद उनकी बालकनी में रोजाना लगभग 200 पक्षी आते हैं. हर सुबह इस खूबसूरत नजारे को देखकर एकता को एहसास हुआ कि पक्षी सिर्फ दाना-पानी के लिए नहीं आते, बल्कि इसलिए भी आते हैं, क्योंकि उन्हें यहां एक सुरक्षित, शांत और प्राकृतिक वातावरण मिलता है.

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