विज्ञापन

हिमाचल में 122 फीट पर बादलों के बीच बना सबसे ऊंचा शिव मंदिर, दीवारों से आती है डमरू की आवाज!

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां का माहौल और भी दिव्य हो जाता है. हजारों श्रद्धालु हर हर महादेव के जयकारों के साथ मंदिर पहुंचते हैं और पहाड़ी हवा में भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

हिमाचल में 122 फीट पर बादलों के बीच बना सबसे ऊंचा शिव मंदिर, दीवारों से आती है डमरू की आवाज!
Mahashivratri 2026: कहा जाता है कि यहां के पत्थरों से डमरू जैसी ध्वनि सुनाई देती है.

Shiva Temple: शांत वादियों में पहाड़ों की गोद में बसा एक ऐसा मंदिर है, जहां आस्था और रहस्य एक साथ महसूस होते हैं. 122 फीट ऊंचा जटोली शिव मंदिर एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है. यह मंदिर सिर्फ अपनी भव्य ऊंचाई और नक्काशीदार वास्तुकला के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखी मान्यता के कारण भी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि यहां के पत्थरों से डमरू जैसी ध्वनि सुनाई देती है. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां का माहौल और भी दिव्य हो जाता है. हजारों श्रद्धालु हर हर महादेव के जयकारों के साथ मंदिर पहुंचते हैं और पहाड़ी हवा में भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है.

कहां स्थित है जटोली शिव मंदिर?

यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित है. पहाड़ों से घिरा यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अनोखा मेल है. मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव यहां कुछ समय के लिए तपस्या करने आए थे, इसलिए इस स्थान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है.

Latest and Breaking News on NDTV

क्यों कहा जाता है एशिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर?

  • मंदिर की ऊंचाई लगभग 122 फीट है.
  • इसकी वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली में बनी है.
  • पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी इसे भव्य रूप देती है.
  • दूर से देखने पर यह मंदिर बादलों के बीच खड़ा प्रतीत होता है.

ऊंचाई और संरचना के कारण यह मंदिर आस्था के साथ-साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र बन चुका है.

पत्थरों से डमरू की आवाज आस्था या रहस्य?

स्थानीय लोगों का मानना है कि जब मंदिर की दीवारों या पत्थरों को हल्के से थपथपाया जाता है, तो उनसे डमरू जैसी ध्वनि निकलती है. कुछ लोग इसे भगवान शिव की उपस्थिति का संकेत मानते हैं, तो कुछ इसे पत्थरों की संरचना और ध्वनि तरंगों का वैज्ञानिक प्रभाव बताते हैं. चाहे यह आस्था हो या विज्ञान, लेकिन इस मान्यता ने मंदिर को और भी रहस्यमय बना दिया है.

महाशिवरात्रि पर विशेष आयोजन

महाशिवरात्रि के दिन यहां विशेष पूजा, रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है. पूरी रात मंदिर परिसर में दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से वातावरण गूंजता रहता है. श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं.

क्यों बन सकता है यह आपकी यात्रा का खास पड़ाव?

  • पहाड़ों की शांत और शुद्ध हवा
  • प्राकृतिक सुंदरता के बीच आध्यात्मिक अनुभव
  • ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
  • फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के लिए बेहतरीन जगह

अगर आप इस महाशिवरात्रि पर किसी ऐसी जगह जाना चाहते हैं, जहां शांति भी हो और शिव भक्ति का अद्भुत अनुभव भी, तो जटोली शिव मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.

जटोली शिव मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, वास्तुकला और रहस्य का संगम है. यहां पत्थरों से आती डमरू की ध्वनि हो या 122 फीट की भव्यता, हर चीज श्रद्धालुओं को एक अलग अनुभव देती है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com