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रोज सोचता था 10 बजे सो जाऊंगा… पर नींद आती थी 2 बजे! 27 साल के शेफ ने बताया कहां कर रहे थे चूक, 90% लोग करते हैं ये गलती

Why I Can not Sleep: आनंद ने बताया कि कैसे वह कुछ महीनों तक इस आदत से परेशान रहे और फिर उन्होंने क्या किया जिसने उनकी लाइफ बदलकर रख दी. आइए जानते हैं 27 साल के शेफ की व्यक्तिगत अनुभव की कहानी.

रोज सोचता था 10 बजे सो जाऊंगा… पर नींद आती थी 2 बजे! 27 साल के शेफ ने बताया कहां कर रहे थे चूक, 90% लोग करते हैं ये गलती
10 PM Sleep Routine: "पहले मुझे लगा कि मैं जल्दी सोने की कोशिश कर रहा हूं, तो नींद खुद ही आ जाएगी."

How to Sleep Early?: कभी-कभी हमारी सोने-जागने की आदतें हेल्थ और लाइफ को बुरी तरह इफेक्ट करती हैं. हालांकि कई बार लेट नाइट सोना और देर से उठना हमारी प्रोफेशनल लाइफ के कारण भी होता है, लेकिन कुछ गलतियां हम खुद भी करते हैं, जिससे पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है. ऐसा ही एक अनुभव 27 साल के आनंद ने शेयर किया. वे 5 स्टार होटल में शेफ हैं. उन्होंने बताया कि मेरी लाइफ हमेशा से बहुत व्यस्त रही है. देर रात तक काम करना मेरी आदत बन चुका था, लेकिन जब काम थोड़ा कम हुआ तो मैंने सोचा अब मैं अपनी नींद सुधारूंगा.

शेफ आनंद ने बताया कि,

मैं रोज प्लान बनाता था कि आज जल्दी सो जाऊंगा, लेकिन जैसे ही रात होती, नींद 2 बजे के बाद ही आती. मैं परेशान हो चुका था, क्योंकि सुबह उठना मुश्किल हो जाता था और दिनभर थकान रहती थी. तब मैंने अपनी आदतों को ध्यान से देखा और समझ आया कि गलती नींद में नहीं, मेरी रूटीन में थी. जो मैं कर रहा था, वही 90% लोग भी करते हैं और यहीं सबसे बड़ी चूक होती है.

मैं बिस्तर पर जाता था, लेकिन दिमाग एक्टिव रहता था

पहले मुझे लगा कि मैं जल्दी सोने की कोशिश कर रहा हूं, तो नींद खुद ही आ जाएगी. लेकिन सच्चाई ये थी कि मैं शरीर को तो आराम दे रहा था, पर दिमाग को नहीं. मैं बिस्तर पर लेटकर फोन स्क्रॉल करता रहता था, कभी वीडियो, कभी सोशल मीडिया. इससे मेरा दिमाग और ज्यादा एक्टिव हो जाता था. यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी और यकीन मानिए, यही गलती ज्यादातर लोग करते हैं.

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फिर मैंने किए ये बदलाव और सुधर गई नींद

1. सोने से 1 घंटा पहले फोन बंद करना

पहले मैं सोचता था कि थोड़ा फोन देखने से क्या फर्क पड़ेगा. लेकिन जब मैंने सच में सोने से 1 घंटा पहले फोन बंद करना शुरू किया, तो फर्क साफ दिखा. अब मैं उस समय में हल्की किताब पढ़ता हूं या बस शांत बैठता हूं. इससे मेरा दिमाग धीरे-धीरे रिलैक्स होने लगता है.

2. कमरे में पूरा अंधेरा रखना

मैं पहले लाइट ऑन रखकर या हल्की रोशनी में सोने की कोशिश करता था. लेकिन, बाद में समझ आया कि अंधेरा नींद के लिए बहुत जरूरी है. अब मैं कमरे को पूरी तरह डार्क रखता हूं, ना कोई तेज लाइट, ना स्क्रीन की रोशनी. इससे शरीर को सिग्नल मिलता है कि अब सोने का समय है.

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3. डिनर हल्का रखना

मेरी एक और बड़ी गलती थी, देर रात भारी खाना खाना. शेफ होने के कारण मैं नई चीजें ट्राई करता था और अक्सर ज्यादा खा लेता था. अब मैं रात का खाना हल्का और समय पर खाता हूं. इससे पेट भी आराम में रहता है और नींद जल्दी आने लगती है.

4. फिक्स टाइम पर बिस्तर पर जाना

पहले मेरा कोई तय समय नहीं था. कभी 10 बजे, कभी 12 बजे, कभी उससे भी देर. अब मैंने एक फिक्स टाइम सेट किया है और हर दिन उसी समय पर बिस्तर पर जाता हूं. शुरू में मुश्किल लगी, लेकिन कुछ दिनों बाद शरीर खुद उसी टाइम पर नींद महसूस करने लगा.

छोटी आदतें और बड़ा फर्क

जब मैंने ये चार चीजें लागू कीं, तो पहले ही हफ्ते में फर्क दिखने लगा. अब मुझे 2 बजे तक जागना नहीं पड़ता. मैं आसानी से 10-11 बजे सो जाता हूं और सुबह फ्रेश उठता हूं. सबसे खास बात अब दिनभर एनर्जी रहती है और मेरा काम भी बेहतर हो गया है.

अगर आप भी मेरी तरह रोज जल्दी सोने का प्लान बनाते हैं लेकिन नींद देर से आती है, तो समझ लीजिए कि समस्या नींद की नहीं, आपकी आदतों की है.

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