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उत्‍तर प्रदेश के इस शहर के पत‍ि हैं नंबर वन, घर के कामों में सबसे ज्‍यादा करते हैं पत्नी की मदद

घरेलू कामों को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता रहता है. खासतौर पर भारत में ऐसे बहुत कम पुरुष हैं जो घर के कामों में पत्नी का हाथ बंटाते हैं.

उत्‍तर प्रदेश के इस शहर के पत‍ि हैं नंबर वन, घर के कामों में सबसे ज्‍यादा करते हैं पत्नी की मदद
हर रोज करते हैं इतने समय तक घर का काम.

Husband Wife Survey: शादीशुदा जिंदगी में अक्सर पति-पत्नी के बीच घर के कामों को लेकर झगड़ा होता रहता है. पत्नी चाहती है कि पति उनके साथ घर के कामों में उनकी मदद करें, लेकिन भारत में लंबे समय तक घर का काम सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी माना जाता रहा है. हालांकि पिछले कुछ सालों में महिलाएं इस मुद्दे पर खुलकर बोलने लगी हैं और इसका असर भी दिखने लगा है. अब कई घरों में पति भी जिम्मेदारी समझते हुए पत्नी का हाथ बंटाने लगे हैं और घर के कामों से होने वाली थकान और दबाव को महसूस करने लगे हैं.

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आखिर क्या कहता है सर्वे (Survey Time Period)

हाल ही में भारत के कुछ शहरों में एक सर्वे किया गया, जिसमें यह जानने की कोशिश की गई कि किस शहर के पुरुष घर के कामों में अपनी पत्नी की सबसे ज्यादा मदद करते हैं. इस सर्वे की रिपोर्ट में जिस शहर ने बाजी मारी है, उसका नाम सुनकर आप थोड़ा चौंक सकते हैं.

यूपी के इस शहर के पुरुष करते हैं घरेलू काम (Men From This UP City Help Most In Household Work)

Selfie With Daughter Foundation ने करीब साढ़े पांच साल तक उत्तर प्रदेश के अलग-अलग शहरों में एक सर्वे किया, जिसका नाम ‘गृहसाथी' रखा गया. इस सर्वे में 13,400 पुरुषों और महिलाओं ने हिस्सा लिया. पुरुषों से सवाल पूछे गए कि वे पीरियड्स के दौरान पत्नी की कैसे मदद करते हैं, बिना कहे घर के कौन से काम करते हैं और उनकी रोजमर्रा की आदतें क्या हैं.

सर्वे में सामने आया कि गोरखपुर के पुरुष सबसे ज्यादा घर के कामों में हाथ बंटाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक गोरखपुर के पुरुष औसतन दिन में 14 मिनट घरेलू काम करते हैं. वहीं लखनऊ और मुरादाबाद के पुरुष घर के कामों में सबसे कम मदद करते पाए गए.

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महिला का घर संभालना पति के काम के बराबर (Household Work Equals Paid Work)

घरेलू कामकाज को कम आंकने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट भी अहम टिप्पणी कर चुका है. एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि महिलाओं का घर संभालना उनके साथी की सैलरी पाने वाले काम के बराबर है. परिवार की देखभाल करने वाली महिलाओं के योगदान का मूल्य पैसों में नहीं आंका जा सकता. ये सर्वे और अदालत की टिप्पणी दोनों ही इस बात की ओर इशारा करते हैं कि शादीशुदा जिंदगी में घर का काम साझा जिम्मेदारी है, न कि सिर्फ एक की.

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