कम उम्र में ही आंखों पर चश्मे लग जाना, आज के समय में एक आम बात हो गई है. मोबाइल, टैबलेट और टीवी का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों पर बुरा असर डाल रहा है. यही वजह है कि अब छोटे-छोटे बच्चे भी चश्मा पहने नजर आ जाते हैं. हालांकि, कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. पीडियाट्रिशियन अभिषेक जेन ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो में डॉक्टर ने 5 आसान तरीके बताए हैं, जिन्हें अपनाकर आप बच्चों की आंखों को स्वस्थ रख सकते हैं या उन्हें कम उम्र में चश्मा लगाने से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-
नंबर 1- रोज 1-2 घंटे बाहर खेलने दें
पीडियाट्रिशियन बताते हैं, बच्चों को हर दिन कम से कम 1 से 2 घंटे बाहर खेलने दें. प्राकृतिक धूप आंखों के सही विकास में मदद करती है. रिसर्च भी बताती है कि जो बच्चे रोज कुछ समय बाहर बिताते हैं, उनमें मायोपिया का खतरा कम हो सकता है. इसलिए बच्चों को सिर्फ घर के अंदर रखने की बजाय थोड़ी देर पार्क या खुले मैदान में खेलने के लिए जरूर भेजें.
नंबर 2- स्क्रीन टाइम रखें सीमितआजकल बच्चे छोटी उम्र से ही मोबाइल और टैबलेट का इस्तेमाल करने लगते हैं. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है और आंखें जल्दी थक जाती हैं. इसलिए स्क्रीन टाइम को सीमित रखें. पढ़ाई के अलावा बच्चों को बेवजह मोबाइल या टीवी देखने की आदत न बनने दें.
नंबर 3- 20-20-20 रूल अपनाएंडॉक्टर कहते हैं, बच्चों की आंखों को हेल्दी रखने के लिए आप 20-20-20 रूल फॉलो कर सकते हैं. इसके लिए बच्चे को हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी चीज को देखने के लिए कहें. इससे आंखों को आराम मिलता है और लगातार स्क्रीन देखने से होने वाला तनाव कम होता है.
नंबर 4- सही दूरी से पढ़ने और स्क्रीन देखने की आदत डालेंबच्चे अक्सर किताब या मोबाइल बहुत पास लाकर देखते हैं. यह आदत आंखों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है. इसलिए उन्हें हमेशा सही दूरी बनाकर पढ़ने और स्क्रीन देखने की आदत सिखाएं. साथ ही ध्यान रखें कि बच्चा हमेशा ऐसी जगह बैठकर पढ़ाई करे, जहां रोशनी अच्छी हो.
नंबर 5- इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करेंइन सब से अलग पीडियाट्रिशियन कहते हैं, अगर बच्चा बार-बार आंखें सिकोड़कर देखता है, टीवी के बहुत पास बैठता है या सिरदर्द की शिकायत करता है, तो इसे सामान्य बात समझकर टालें नहीं. ये आंखों की समस्या के शुरुआती संकेत हो सकते हैं. ऐसे में बिना देरी किए आंखों के डॉक्टर से जांच करवानी चाहिए.
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