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पापा कभी 'I Love You' नहीं बोलते, फिर भी सबसे ज्यादा प्यार कैसे जताते हैं?

पिता अक्सर अपने प्यार को शब्दों में नहीं, बल्कि अपने कामों में दिखाते हैं, मनोविज्ञान के अनुसार, पिता का बच्चों के जीवन में एक्टिव रहना उनके कॉन्फिडेंस, मेंटल हेल्थ और पर्सनालिटी को मजबूत बनाता. जानिए कैसे अलग तरीके से प्यार जताते हैं पापा.

पापा कभी 'I Love You' नहीं बोलते, फिर भी सबसे ज्यादा प्यार कैसे जताते हैं?
बच्चों की परवरिश में पिता का रोल क्यों है खास?
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अक्सर कहा जाता है कि मां अपने प्यार को लफ्जों और इमोशन्स से जाहिर करती है. जबकि पिता का प्यार उनके कामों में दिखाई देता है. कई बार बच्चे या परिवार के लोग ये महसूस करते हैं कि पिता कम बोलते हैं या अपने इमोशन्स को खुलकर नहीं बताते, लेकिन मनोविज्ञान का मानना है कि पिता का अपने बच्चों के प्रति प्यार जताने का तरीका अलग होता है. वो खेलते हैं, अपने बच्चों को सिक्योर करते हैं, मुश्किल समय में साथ खड़े रहते हैं और बच्चों को खुद पर डिपेंड होना सिखाते हैं. यही छोटी-छोटी बातें बच्चों के कॉन्फिडेंस और मेंटल हेल्थ को स्ट्रॉन्ग बनाती हैं.

खेल-खेल में सिखाते हैं जिंदगी के बड़े सबक

पिता अक्सर बच्चों के साथ ऐसे काम करते हैं जिसमें शरीर की ताकत का ज्यादा इस्तेमाल होता है. साइक्लोजिस्ट इसे ‘रफ एंड टम्बल प्ले' कहते हैं. इस तरह का खेल बच्चों को हार-जीत एक्सेप्ट करना, अपने इमोशन्स को कंट्रोल करना और गिरकर फिर से उठना सिखाता है. नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिनमें भी यह बताया गया है कि बच्चों के दिमागी विकास में पिता का रोल बहुत जरूरी है.

सुरक्षा का एहसास देते हैं

जब पिता बच्चे की जिंदगी में एक्टिव रूप से शामिल होते हैं तो बच्चे खुद को ज्यादा सेफ महसूस करते हैं. ये सुरक्षा केवल फाइनेंशियल नहीं होती, बल्कि इमोशनल भी होती है. पिता का साथ बच्चों में डर और इनसिक्योरिटी की भावना को कम करता है. कई स्टडीज. उनमें बिहेवियर से जुड़ी समस्याएं कम देखने को मिलती है.

बच्चों को बनाते हैं आत्मनिर्भर

पिता अक्सर बच्चों को नई चीजें आजमाने के लिए मोटिवेट करते हैं. चाहे पहली बार साइकिल चलाना हो, स्कूल की किसी एक्टिविटी में हिस्सा लेना हो या कोई नई स्किल सीखना हो, पिता उन्हें आगे बढ़ने के लिए इंस्पायर करते हैं करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार ये मोटिवेशन ही बच्चों को जोखिम लेने की समझ, कॉन्फिडेंस डेवलेप करने में मदद करता है.

सिखाने और मदद करने में छिपा होता है प्यार

कई पिता अपने जज्बात शब्दों से कम और कामों से ज्यादा व्यक्त करते हैं. बच्चे का होमवर्क समझाना, कोई चीज ठीक करना सिखाना या किसी मुश्किल काम में साथ देना, ये सब उनके प्यार जताने के तरीके हैं. मनोवैज्ञानिक इसे ‘स्कैफोल्डिंग' कहते हैं. यानी बच्चे को धीरे-धीरे केपेबल बनाना.

चुपचाप मौजूद रहना भी है प्यार

कई बार सिर्फ बच्चे की बातें ध्यान से सुनना, उसके मुश्किल समय में साथ बैठना या जरूरत पड़ने पर उसके लिए मौजूद रहना ही सबसे बड़ा प्यार होता है. ये बच्चों को भरोसा, स्टेबिलिटी और रिश्तों की अहमियत सिखाता है.

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दीक्षा सोनी
Sub-Editor
दीक्षा सोनी पिछले 4 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. इन्हें फीचर और न्यूज राइटिंग का अनुभव है. बतौर सब एडिटर 2022 से एनडीटीवी में कार्यरत... और पढ़ें
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