दिल्ली के रहने वाले मयंक को घूमने का बहुत शौक था. उन्हें हर जगह को एक्सप्लोर करना काफी रोमांचक लगता था. जब सिंगल थे तब बात अलग थी, लेकिन जब शादी हुई तो चीजें बदल गईं. जैसे-जैसे फैमिली बढ़ी वैसे-वैसे महंगाई, बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्च और बाकी जिम्मेदारियों के बीच लंबी छुट्टियों का प्लान बनाना आसान नहीं रहा. पहले जहां बिना सोचे-समझे मयंक बैग उठाकर निकल पड़ते थे, वहीं अब टिकट, होटल, खाने और लोकल ट्रैवल का खर्च जोड़ते ही पूरा प्लान भारी लगने लगता था.

कैसे मैनेज किया मयंक ने?
मयंक ने बताया कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने एक नया रास्ता निकाला लंबी वेकेशन की जगह छोटे-छोटे डे ट्रिप.
मयंक ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्हें एहसास हुआ कि वे हर बार “सही समय” या “अच्छे बजट” का इंतजार करते-करते घूमना ही छोड़ रहे हैं. बच्चों को भी बाहर जाने का मन होता था और दोनों पति-पत्नी भी काम के बीच थोड़ा ब्रेक चाहते थे. तब उन्होंने तय किया कि अगर 4 से 5 दिन की छुट्टी संभव नहीं है, तो एक दिन के छोटे ट्रिप ही सही. बस उसी दिन से उनके घर में डे ट्रिप का सिलसिला शुरू हो गया.
सुबह निकलो, रात तक लौट आओ
मयंक के मुताबिक डे ट्रिप का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसमें ज्यादा प्लानिंग नहीं करनी पड़ती. होटल बुकिंग का झंझट नहीं, लंबी पैकिंग नहीं, और छुट्टी बढ़ाने की टेंशन भी नहीं. सुबह जल्दी निकलो, दिन भर परिवार के साथ घूमो-फिरो, अच्छा खाना खाओ और रात तक घर लौट आओ. अगले दिन फिर अपनी दिनचर्या में लग जाओ.
दिल्ली में रहने का फायदा भी उन्हें खूब मिला
- कभी परिवार के साथ मुरथल निकल गए, कभी नीमराना.
- कभी भरतपुर, तो कभी दिल्ली-एनसीआर के आसपास के किसी शांत फार्म या पार्क में दिन बिताया.
- कई बार उन्होंने पुराने दिल्ली वाले फूड वॉक जैसे छोटे शहर के अंदर वाले ट्रिप भी किए, जहां खर्च कम हुआ लेकिन अनुभव उतना ही मजेदार रहा.
खर्च कम, यादें पूरी
मयंक कहते हैं कि पहले एक छोटी फैमिली ट्रिप का मतलब था कम से कम 20 से 25 हजार रुपये का बजट. उसमें ट्रैवल, होटल, बाहर का खाना और बाकी खर्च मिलाकर जेब पर अच्छा-खासा असर पड़ता था, लेकिन डे ट्रिप में मामला काफी हल्का हो गया. पेट्रोल, टोल, एक-दो मील और एंट्री टिकट में ही दिन निकल जाता है. कई बार तो पूरा ट्रिप 3 से 5 हजार रुपये में निपट जाता है.
मयंक के अनुसार, मिडिल क्लास परिवारों के लिए यही सबसे बड़ा सुकून है कि घूमने का मजा लेने के लिए हर बार बड़ी रकम खर्च करना जरूरी नहीं. अगर प्लान स्मार्ट हो, तो कम बजट में भी परिवार के साथ अच्छा वक्त बिताया जा सकता है.
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