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Parents से हर समय बहस होती रहती है? टीनएजर इन 5 आसान तरीकों से अपने रिश्ते को बना सकते हैं बेहतर

अक्सर माता-पिता के साथ फोन का इस्तेमाल, दोस्तों के साथ समय बिताना, पढ़ाई, कपड़े, बाहर जाने या पर्सनल स्पेस को लेकर मतभेद हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे आजादी चाहते हैं. ऐसे में बच्चों को माता-पिता के साथ अच्छा रिश्ता बनाने के लिए इन आसान टिप्स को फोलो करना चाहिए.

Parents से हर समय बहस होती रहती है? टीनएजर इन 5 आसान तरीकों से अपने रिश्ते को बना सकते हैं बेहतर
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जैसे-जैसे हम बड़े होने लगते हैं वैसे-वैसे माता-पिता के साथ रिश्ते में कई बदलाव आने लगते हैं. अक्सर माता-पिता के साथ फोन का इस्तेमाल, दोस्तों के साथ समय बिताना, पढ़ाई, कपड़े, बाहर जाने या पर्सनल स्पेस को लेकर मतभेद हो जाता है, क्योंकि इस उम्र में बच्चे आजादी चाहते हैं, जबकि माता-पिता उनकी सुरक्षा और भलाई को लेकर चिंतित रहते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रिश्तों में दूरी आ जाए. बातचीत और व्यवहार में कुछ छोटे बदलाव करके टीनएजर अपने माता-पिता के साथ संबंधों को और मजबूत बना सकते हैं. इससे घर का माहौल भी ज्यादा खुशहाल और सहज बन सकता है.

माता-पिता से बात करें

हर बातचीत का गंभीर होना जरूरी नहीं है. आप अपने दिनभर की बातें, स्कूल में हुई कोई मजेदार घटना या फिर कोई पसंदीदा शो के बारे में अपने माता-पिता से बात कर सकते हैं. इससे आपसी बातचीत का सिलसिला बना रहता है. जब माता-पिता आपकी रोजमर्रा की बातें सुनने के आदी हो जाते हैं, तो बाद में किसी बड़ी परेशानी या मुश्किल स्थिति के बारे में उनसे खुलकर बात करना भी आसान हो जाता है. इससे रिश्ते में भरोसा बढ़ता है और आप एक-दूसरे को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं.

अकेले रहने का मन हो, तो माता-पिता को बताएं

बड़े होने के साथ अपनी निजी जगह और थोड़ा अकेले समय चाहना बिल्कुल सामान्य बात है, लेकिन अगर आप अचानक सबसे दूरी बना लें या बात करना बंद कर दें, तो माता-पिता चिंतित हो सकते हैं. ऐसे में बिना कुछ कहे चले जाने या बात करने से मना करने के बजाय उन्हें शांति से बताएं कि आपको थोड़ी देर अकेले रहने की जरूरत है और बाद में आप बात करेंगे. इससे उन्हें समझ आएगा कि आप सिर्फ थोड़ा समय चाहते हैं, उन्हें अपने से दूर नहीं कर रहे हैं.

उनकी बात भी ध्यान से सुनें

कई बार जब माता-पिता किसी बात के लिए मना करते हैं, तो ऐसा लगता है कि वे आपकी बात समझ ही नहीं रहे हैं, लेकिन बहस करने से पहले यह जानने की कोशिश करें कि वे उस बात को लेकर क्यों परेशान हैं या उन्हें क्या चिंता है. हो सकता है कि आप उनकी राय से सहमत न हों, लेकिन उनकी सोच को समझने से बातचीत आसान हो सकती है और तनाव भी कम हो सकता है.

जरूरी बातों के लिए सही समय चुनें

जब दोनों तरफ गुस्सा हो, तब गंभीर बातें करना अक्सर सही नतीजा नहीं देता. अगर आपको देर रात बाहर जाने, किसी दोस्ती, सोशल मीडिया के नियमों या किसी छिपी हुई बात पर चर्चा करनी है, तो ऐसा समय चुनें जब माहौल शांत हो. जब आप और आपके माता-पिता दोनों शांत हों, तो एक-दूसरे की बात सुनना और समझना आसान हो जाता है.

गलतियों को स्वीकार करें

टीनएज को अपनी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी बात माता-पिता को बताने की जरूरत नहीं होती, लेकिन किसी गलती को छिपाने से कई बार छोटी समस्या भी बड़ी बन सकती है. अगर आपसे कोई गलती हुई है, तो उसे स्वीकार करना शुरुआत में मुश्किल लग सकता है. फिर भी सच बोलने और अपनी जिम्मेदारी लेने से माता-पिता का आप पर भरोसा बढ़ता है. समय के साथ इससे आपका रिश्ता और मजबूत बन सकता है.

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