Protein And Calcium Rich Foods: बढ़ती उम्र के साथ-साथ खानपान और लाइफस्टाइल पूरी तरह से बदल जाता है. खासकर 40 साल की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं, जिसे चिकित्सकीय भाषा में 'सार्कोपेनिया' कहा जाता है. इस दौरान प्रोटीन की कमी से हड्डियों का कमजोर होना, रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी में कमी और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं. ऐसे में खानपान का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है. गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स ने प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर चीजों का सेवन करने की सलाह दी है.
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गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. शुभम वत्स के मुताबिक, रोजाना के खाने में कुछ चीजों को शामिल करना असरदार हो सकता है, क्योंकि ये फूड्स प्राकृतिक प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन से भरपूर हैं, इसलिए हड्डियों के कमजोर होने के बाद इस कमी को आसानी से पूरा किया जा सकता है.
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अंडे
अंडे प्रोटीन का सबसे शुद्ध और बेहतरीन स्रोत है. अंडों में मौजूद प्रोटीन शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित हो जाता है, जिससे मांसपेशियों की मरम्मत और रिकवरी में तेजी आती है. शाकाहारी और मांसाहारी की बहस में अक्सर अंडों को नजरअंदाज कर दिया जाता है. नाश्ते में कम से कम एक उबला अंडा शामिल करने से शरीर को आवश्यक अमीनो एसिड मिलते हैं और आप दिनभर एनर्जेटिक बने रहते हैं.
दही या ग्रीक दही
बढ़ती उम्र के साथ पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है, ऐसे में दही या ग्रीक योगर्ट एक बेहतरीन विकल्प है. यह फूड्स न केवल प्रोटीन से भरपूर होते हैं, बल्कि इनमें प्रोबायोटिक्स भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. दही पेट को आराम देता है और आंतों के स्वास्थ्य को सुधारता है, जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ती है. ग्रीक योगर्ट में सादे दही की तुलना में अधिक प्रोटीन होता है, इसलिए इसे आहार में शामिल करने से ज्यादा फायदा मिलता है.
पनीर या टोफू40 वर्ष की आयु के बाद हड्डियों के कमजोर होने का खतरा अधिक बढ़ जाता है. ऐसे में पनीर और टोफू दोनों ही कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होते हैं. पनीर में मौजूद कैल्शियम हड्डियों की घनत्व बनाए रखने में मदद करता है, जबकि टोफू प्रोटीन का एक उत्कृष्ट शाकाहारी विकल्प है. यह दोनों फूड्स मांसपेशियों को मजबूत बनाने और जोड़ों के दर्द से बचाने में सहायक होते हैं.
मूंग या मसूर की दालभारतीय भोजन में दालों का विशेष महत्व है और बढ़ती उम्र में मूंग दाल सबसे अधिक लाभदायक होती है. यह दालें आसानी से पच जाती हैं और शरीर को वनस्पति-आधारित प्रोटीन प्रदान करती हैं. गैस या अपच से पीड़ित लोगों के लिए मूंग दाल एक सुरक्षित और पौष्टिक विकल्प है. दालों में फाइबर की मात्रा भी अधिक होती है, जो ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में सहायक होता है.
अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.
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