हम सभी जानते हैं कि समय और तकनीक के साथ‑साथ काम करने का तरीका भी बदला है. एक समय था जब सिर्फ़ पुरुष नौकरी और व्यापार करते थे, वहीं आज महिलाएं भी बराबर काम कर रही हैं. एक लंबी यात्रा के बाद वे आर्थिक रूप से ज्यादा सशक्त हुई हैं. हां, कई क्षेत्रों में अभी भी रास्ते जटिल हैं…
मेरी ही टीम की एक सदस्य हैं दीक्षा सोनी. हाल ही में उन्होंने अपनी शिफ्ट में कुछ बदलाव कराए. इन बदलावों के कुछ ही दिनों बाद मैंने दीक्षा में काफी बदलाव देखे.
असल में दीक्षा बाहर का तला‑भुना बहुत खाती थीं. दोस्तों के साथ रोज़ाना कुछ न कुछ बाहर का खाना हो ही जाता था, भले ही चाय और मस्का बन ही क्यों न हो. वह रोज़ कुछ न कुछ बाहर का खा ही रही थीं. दीक्षा में दिखे बदलाव पर जब मैंने उनसे बात की, तो उन्होंने बताया कि-

60 दिन रोज़ फल खाने का फैसला क्यों किया?
दीक्षा ने बताया कि अक्सर आउटडोर शूट्स, समय पर न खाने की आदत और लगातार स्क्रीन के सामने रहने की वजह से खुद को अक्सर नज़रअंदाज़ करती रहीं. बाहर से देखने पर वे हमेशा “नॉर्मल और एक्टिव” लगती थीं, लेकिन अंदर से महसूस होने लगा था कि शरीर साथ नहीं दे रहा.

तभी एक दिन जिम ट्रेनर ने मुझसे कहा-



मैंने 60 दिनों तक रोज़ क्या किया?
मैंने तय किया कि हर दिन कम से कम 2 सर्विंग फल खाऊंगी. कभी सेब, केला, पपीता, कभी संतरा या मौसमी—बस रोज़ कोई न कोई फल ज़रूर मेरी डाइट में होना चाहिए था. शुरुआत में यह आदत अजीब लगी, लेकिन धीरे‑धीरे यह मेरी रूटीन बन गई.
60 दिनों में शरीर में दिखे ये 6 बड़े बदलाव?
1. डाइजेशन और पेट की समस्या में सुधार
पहले मुझे अक्सर भारीपन और कब्ज़ की समस्या रहती थी. लेकिन 10–12 दिनों के अंदर ही यह काफी हद तक ठीक होने लगा. फलों में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और गट हेल्थ सुधारता है.
2. शरीर हल्का और एनर्जी ज़्यादा महसूस होने लगी
पहले दिनभर सुस्ती रहती थी, लेकिन अब सुबह उठने के बाद ही फर्क महसूस होने लगा. फलों में मौजूद नेचुरल कार्बोहाइड्रेट्स और विटामिन्स शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं.
3. इम्यूनिटी में सुधार दिखा
पहले मुझे छोटी‑छोटी बातों पर सर्दी‑खांसी हो जाती थी, लेकिन इन 60 दिनों में ऐसा कम हुआ. इसकी वजह भी फल ही थे. फलों में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं.

4. वजन कंट्रोल में आने लगा
मैंने अलग से कोई डाइटिंग नहीं की, लेकिन जंक फूड कम हो गया क्योंकि फल खाने से पेट भरा‑भरा रहता था. ऐसे में जंक फूड में दिलचस्पी भी कम होने लगी. फलों में फाइबर ज़्यादा और कैलोरी कम होती है, जिससे ओवरईटिंग कम होती है.
5. दिल और ब्लड प्रेशर पर असर
हालांकि यह तुरंत दिखने वाला बदलाव नहीं था, लेकिन 2 महीने बाद मेरा बीपी पहले से ज़्यादा स्टेबल था. फल और सब्जियों का सेवन बुरे कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है और दिल की बीमारियों का जोखिम भी कम कर सकता है.
6. दिमाग और मूड में फर्क
सबसे ताज्जुब की बात यह थी कि मैं पहले से ज़्यादा शांत और फोकस्ड महसूस करने लगी. फल और सब्जियों में मौजूद विटामिन्स, एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर दिमाग में “फील‑गुड” केमिकल्स के बैलेंस को बेहतर करते हैं, जिससे मूड और ओवरऑल वेल‑बीइंग पर पॉजिटिव असर पड़ता है.

सबसे बड़ा सरप्राइज़ क्या था?

क्या सिर्फ़ फल खाने से सब ठीक हो जाता है?
नहीं. मैंने यह भी समझा कि सिर्फ़ फल खाना ही काफी नहीं है. बैलेंस्ड डाइट, भरपूर पानी और एक्टिव लाइफस्टाइल भी ज़रूरी है. रोज़ाना करीब 400 ग्राम फल और सब्जियां लेना सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. मशहूर कहावत है— An apple a day keeps the doctor away.
लेकिन मैं कहती हूं—


आज मैं क्या कह सकती हूं?
आज 60 दिन पूरे होने के बाद मैं यह विश्वास के साथ कह सकती हूं कि यह एक छोटी आदत थी, लेकिन इसका असर पूरे शरीर पर दिखा. अगर आप भी मेरी तरह फल खाना टालते हैं, तो एक बार खुद को 60 दिन का चैलेंज देकर देखें. शायद आपको भी अपने शरीर में वो बदलाव दिख जाए, जिसकी आपको उम्मीद भी नहीं थी.
नोट: यह अनुभव दीक्षा की निजी दिनचर्या और आदतों पर आधारित है. फल खाना सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन किसी भी तरह की डाइट अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना ज़रूरी है.
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