केंद्र सरकार देश में रोजगार नियमों को लेकर बदलाव करती रहती है. ये बदलाव श्रमिकों के हित के लिए किए जाते हैं. इसके तहत कामगारों को न्यूनतम वेतन, नियुक्ति पत्र और सामाजिक सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है. सरकार हमेशा कहती है कि वह श्रमिकों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यों के साथ मिलकर काम कर रही है. जानें केंद्र सरकार ने बोनस से लेकर वीकली ऑफ और ओवरटाइम तक के लिए क्या नियम तय किए हुए हैं.
नौकरी के लिए सरकार ने बनाए हैं ये नियम
- हर सप्ताह एक दिन या एक दिन से अधिक का विश्राम दिया जाएगा.
- यदि कोई नियोक्ता कर्मचारी का वेतन काटना चाहता है तो कर्मचारी को स्पष्टीकरण देने का अवसर देगा और उसके बाद किसी नुकसा या हानि के लिए यदि कोई कटौती की जाती है तो ऐसी कटौती करने की तारीख 15 दिन के भीतर सूचना कर्मचारी को दी जाएगी.
- जहां कर्मचारी ठेकेदार के माध्यम से काम कर रहे हैं, वहां वह कंपनी ठेकेदार को कर्मचारियों के वेतन के संबंध में देय राशि का भुगतान करेगा.
- कंपनी को कर्मचारियों से संबंधी सभी तरह की डिटेल और पहचान पत्र आदि का विवरण रखना होगा.
- न्यूनतम मजदूरी ऐसे तय होगी- मानक श्रमिक वर्ग का परिवार, प्रतिदिन प्रति उपभोग इकाई हेतु 2700 कैलोरी की खपत, प्रति मानक श्रमिक वर्ग परिवार के लिए प्रति वर्ष 66 मीटर कपड़ा, आवासीय किराया व्यय जो भोजन और वस्त्र व्यय का 10 प्रतिशत होगा, ईंधन, बिजली और व्यय की अन्य विविध मदें जो न्यूनतम मजदूरी की 20 प्रतिशत होंगी, बच्चों का शिक्षा का व्यय, चिकित्सा आवश्यकताएं, मनोरंजन और अन्य आकस्मिक व्यय जो न्यूनतम मजदूरी का 25 प्रतिशत होगा.
- बोनस की राशि की गणना आबंटन योग्य सरप्लस सेट ऑन अथवा सेट ऑफ की अधिकता अथवा कमी, जैसा भी मामला हो, को ध्यान में रखते हुए की जाएगी. इसमें धारा 26 के अनुसार गणना की जाएगी.
नौकरी के लिए सरकार द्वारा बनाए गए नियमों की पूरी जानकारी इस लिंक से प्राप्त करें- https://www.labour.gov.in/static/uploads/2026/01/44b4b68890bb457be71155b25fcda804.pdf
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