विज्ञापन

30 हजार की लागत और डेढ़ लाख की कमाई, मऊ के युवा किसान ने कर दिया कमाल

अक्सर युवा बेहतर भविष्य के लिए नौकरी की तलाश में शहरों की ओर रुख करते हैं, लेकिन मऊ जनपद के पकड़ी गांव निवासी प्रगतिशील किसान अखिलेश मौर्य ने इस सोच को बदलने का काम किया है.

30 हजार की लागत और डेढ़ लाख की कमाई, मऊ के युवा किसान ने कर दिया कमाल
  • मऊ जिले के किसान अखिलेश मौर्य ने ग्रेजुएशन और आईटीआई के बाद खेती को अपना करियर चुना और सफलता पाई.
  • उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने ऑर्गेनिक खीरे की खेती शुरू की, जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिला.
  • मार्च में ड्रिप और बेड विधि से पौधों की रोपाई हुई और मई से फसल की हार्वेस्टिंग शुरू हो गई.
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के पकड़ी गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान अखिलेश मौर्य ने पारंपरिक सोच को बदला और नौकरी के बजाय खेती को अपना करियर चुना. अब सफलता उनके कदम चूम रही है. आईटीआई और ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने खेती में कुछ नया करने का फैसला लिया. उद्यान विभाग के मार्गदर्शन से उन्होंने ऑर्गेनिक खीरे की खेती शुरू की और उनका यह फैसला सही साबित हुआ. मौर्य की यह कोशिश अब उन्‍हें न सिर्फ बेहतरीन मुनाफा दे रही है, बल्कि यह दूसरे युवाओं को भी प्रेरित कर रही है. अखिलेश मौर्य ने महज 30 हजार रुपये लगाकर डेढ़ लाख रुपये की कमाई की है.  

अक्सर युवा बेहतर भविष्य के लिए नौकरी की तलाश में शहरों की ओर रुख करते हैं, लेकिन प्रगतिशील किसान अखिलेश मौर्य ने इस सोच को बदलने का काम किया है.  अखिलेश मौर्य ने बताया कि ग्रेजुएशन और आईटीआई की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने नौकरी करने की बजाय खेती में कुछ नया करने का निर्णय लिया. उद्यान विभाग के जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्ता से मिले मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग के बाद उन्होंने ऑर्गेनिक खीरे की खेती शुरू की. शुरुआत में बाजार में खीरे का दाम कम मिला, लेकिन अब कीमत बेहतर होने से अच्छी आमदनी हो रही है. 

ये भी पढ़ें: डीजल की तलाश में 7 घंटे तक भटकता रहा किसान, किसी तरह इंतजाम होने पर आधी रात शुरू की खेत की जुताई

ड्रिप और बेड विधि से पौधों की रोपाई

अखिलेश मौर्य वर्तमान में खीरे की तीन वैरायटी- साईजेंटा, क्लाउच की अर्नो और दिल्ली की एसआईआर वैरायटी की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि मार्च महीने में ड्रिप और बेड विधि से पौधों की रोपाई की गई थी और मई की शुरुआत से ही फसल की हार्वेस्टिंग शुरू हो गई. पूरी खेती ऑर्गेनिक तरीके से की जा रही है, जिससे लोगों को शुद्ध और सुरक्षित सब्जियां मिल सकें. 

ये भी पढ़ें: बिना दस्तावेज नहीं मिलेगा डीजल! महाराष्ट्र में किसानों के लिए कड़े नियम लागू, दिखाना होगा RC बुक या पहचान पत्र

रोजाना 7 से 8 मजदूर कर रहे हार्वेस्टिंग

उन्होंने बताया कि एक एकड़ में की गई इस खेती में प्रतिदिन 7 से 8 मजदूर हार्वेस्टिंग का काम कर रहे हैं. शुरुआत में खीरे का भाव 14 से 15 रुपये प्रति किलो था, लेकिन अब बाजार में 20 रुपये से अधिक कीमत मिल रही है. अब तक करीब 10 टन खीरे की पैदावार हो चुकी है. 

जमकर मुनाफा कमा रहे अखिलेश मौर्य 

अखिलेश के अनुसार, इस खेती में ड्रिप, बेड तैयार करने और बीज सहित कुल 30 हजार रुपये की लागत आई थी, जबकि केवल 23 दिनों में ही करीब 1 लाख 50 हजार रुपये की कमाई हो चुकी है. उनका कहना है कि खीरे की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है और इसकी बाजार में लंबे समय तक मांग बनी रहती है. 

युवा किसान अखिलेश मौर्य की यह सफलता साबित करती है कि यदि हौसले बुलंद हों और मेहनत के साथ नई तकनीक अपनाई जाए, तो खेती भी रोजगार और समृद्धि का बड़ा जरिया बन सकती है. 

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com