झारखंड के 1900 से ज्यादा चयनित JSSC-CGL अभ्यर्थियों को दिवाली से ठीक पहले बड़ी राहत मिली है. झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले को गलत ठहराया है, जिसमें JSSC की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था. झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने कहा कि इस तरह सामूहिक रूप से परीक्षा रद्द नहीं की जा सकती. साथ ही, आपराधिक अभियोजन के बिना किसी भी चयनित अभ्यर्थी को नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता. इस फैसले के बाद 1900 से अधिक चयनित अभ्यर्थी झारखंड सरकार के साथ अपनी नौकरी जारी रख सकेंगे.
सरकार ने रद्द की थी परीक्षा
दरअसल झारखंड में JSSC CGL की परीक्षा आयोजित हुई थी, जिसकी पूरी प्रक्रिया भी खत्म हुई और पास होने वाले अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी मिल गई. इसके बाद झारखंड लोक सेवा आयोग की एक परीक्षा में गड़बड़ी का मामला सामने आया और कई दिनों तक रांची में प्रदर्शन चलता रहा. इसी बीच अभ्यर्थियों ने इस JSSC CGL परीक्षा पर भी सवाल उठाए और इसे रद्द करने की मांग की. सरकार प्रदर्शनकारियों के आगे झुक गई और एक साथ कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया, जिसमें ये परीक्षा भी शामिल थी.
सरकार ने तर्क दिया था कि परीक्षा पूरी तरह से दूषित थी और ये पता लगाना मुश्किल था कि कौन नकल करके पास हुआ है और कौन नहीं, इसीलिए परीक्षा को रद्द किया जाना ही आखिरी विकल्प था. हालांकि इस फैसले को अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. अब हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले को गलत ठहराया है.
सरकारी नौकरी पर लटकी थी तलवार
झारखंड में JSSC CGL परीक्षा निकालने वाले 1900 से ज्यादा अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी मिली थी, लेकिन सरकार के एक फैसले ने उन्हें फिर से बेरोजगार कर दिया था. ऐसे में ये अभ्यर्थी लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और गुहार लगा रहे थे कि उनके साथ ऐसा न किया जाए. उनका कहना था कि कुछ लोगों की गलती की सजा सभी को क्यों दी जा रही है. फिलहाल इन सभी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
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