JSSC CGL परीक्षा को रद्द करने के झारखंड सरकार के फैसले को हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा है कि ये एकतरफा फैसला है और ऐसे सामूहिक रूप से परीक्षा को रद्द नहीं किया जा सकता है. इससे JSSC CGL निकालने वाले झारखंड में सरकारी नौकरी कर रहे करीब दो हजार उम्मीदवारों को राहत मिली है, लेकिन धांधली को लेकर प्रदर्शन करने वाले युवाओं ने सरकार पर हमला बोला है. उनका कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला झारखंड सरकार की नाकामी को दिखाता है और सरकार ने उनके साथ विश्वासघात किया है.
राज्य सरकार पर भड़के छात्र
एक छात्र नेता ने कहा, कोर्ट ने जो फैसला लिया है, वो इस आधार पर फैसला सुनाया गया, जो 17 अगस्त को सरकार ने परीक्षा को रद्द की थी, उसका कोई ठोस आधार नहीं दिया गया. जब सुनवाई हो रही थी, तब हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि इस फैसले को लेने के पीछे का मजबूत आधार पेश कीजिए. आज जो फैसला सुनाया गया है, उससे यही लग रहा है कि राज्य सरकार ने मजबूती से कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा. राज्य सरकार जो बंद लिफाफे के बारे में बोल रही थी, उसके नाम पर झारखंड के लाखों छात्रों के साथ धोखा हुआ है.
विश्वासघात का लगाया आरोप
अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा का मास्टरमाइंट मिथिलेश सिंह अब तक गिरफ्तार है, रोज छापेमारी हो रही है और लोग पकड़े जा रहे हैं. सीआईडी की केस डायरी में भी खुलासा हुआ है कि नेपाल में 135 सवाल रटवाए गए थे, इसके बाद भी झारखंड के लाखों छात्रों के हित में फैसला नहीं आया तो उसका कारण झारखंड सरकार है. राज्य सरकार ने झारखंड के लाखों छात्रों को विश्वास दिलाया था कि आप आंदोलन खत्म कीजिए, हमने एग्जाम रद्द कर दिया है और मजबूती से कोर्ट में भी पक्ष रखेंगे, लेकिन ये आज विश्वासघात हुआ है.
#WATCH | Ranchi: On Jharkhand High Court quashes state govt's decision to cancel JSSC CGL exam and recruitment advertisement, a student leader says, "... The High Court's order on the JSSC CGL examination is about the state government's decision to cancel the exam on August 17, 2024. The court had repeatedly asked the government to present strong grounds for the cancellation. The court's verdict suggests that the state government failed to effectively defend its decision..."
— ANI (@ANI) November 6, 2026
सुप्रीम कोर्ट जाने की बात
छात्रों ने कहा है कि फिलहाल ये सिंगल बेंच का फैसला है, इसमें राज्य सरकार की मंशा साफ हो चुकी है. झारखंड के लाखों छात्रों को धोखा देने का काम किया जा रहा है. राज्य सरकार के पास अभी भी मौका है. हम लोग राज्य सरकार पर ज्यादा भरोसा नहीं कर रहे हैं, हम डबल बेंच या सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर जाएंगे. हमने पहले भी कहा है कि अगर कोर्ट की तरफ से छात्रों के हित में फैसला नहीं आता है तो हम लोग आंदोलन शुरू करेंगे.
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