- X पर तनुज की पोस्ट ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया. विदेश जाने वालों को 440 वोल्ट का झटका लग सकता है
- आपका पैकेज भारतीय रुपयों में करीब 77 लाख रुपये सालाना है, तो कागज पर ये रकम किसी लॉटरी जैसी लगती है
- आपके इस आलीशान पैकेज का करीब 40% हिस्सा तो सीधे टैक्स की भेंट चढ़ जाता है. हाथ में कुछ नहीं आता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तनुज नाम के एक शख्स की पोस्ट इस समय इंटरनेट पर तहलका मचा रही है. जर्मनी में 6 साल गुजारने के बाद तनुज ने जो 'रियलिटी चेक' दिया है, उसे सुनकर विदेश जाने की चाहत रखने वालों को 440 वोल्ट का झटका लग सकता है.
तनुज बताते हैं कि अगर जर्मनी में आपका पैकेज 70,000 यूरो यानी भारतीय रुपयों में करीब 77 लाख रुपये सालाना है, तो कागज पर ये रकम किसी लॉटरी जैसी लगती है. लेकिन ठहरिए. जैसे ही आप वहां कदम रखेंगे, असलियत से पाला पड़ेगा.
टैक्स की तगड़ी मार: आपके इस आलीशान पैकेज का करीब 40% हिस्सा तो सीधे टैक्स की भेंट चढ़ जाता है. यानी कमाई का एक बड़ा हिस्सा सरकार के खाते में चला गया.
किराए का तगड़ा झटका: म्यूनिख या बर्लिन जैसे बड़े शहरों में एक अदद फ्लैट का किराया ही 1,500 यूरो (यानी करीब सवा लाख रुपये से ज्यादा) तक पहुंच जाता है.
महंगे बिल और सेवाएं: बिजली, इंटरनेट और इंश्योरेंस के बिल इतने भारी-भरकम हैं कि जेब ढीली होते देर नहीं लगती. बाहर खाना खाना और किसी भी तरह की सर्विस लेना वहां बेहद महंगा सौदा है.
Reality check for Indians dreaming of Germany or Europe.
— Tanuj (@tanujDE3180) September 17, 2026
I lived in Germany for 6 years.
A €70k salary sounds massive in INR.
(~65–70 LPA after conversion)
But reality looks more like this:
- ~40% gone in taxes
- €1.5k+ rent in major cities
- expensive electricity &…
तनुज ने एक बहुत पते की बात कही है. परचेजिंग पावर पैरिटी (PPP) यानी महंगाई और रहन-सहन के हिसाब से देखें, तो जर्मनी का 77 लाख का पैकेज भारत के 32 से 35 लाख रुपये के पैकेज जैसा ही महसूस होता है. इसलिए अपनी अच्छी-खासी भारतीय नौकरी छोड़ने से पहले सौ बार सोचें.
इंटरनेट पर छिड़ गई जंग
इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोगों का कहना है कि लोग सिर्फ विदेशी करेंसी को रुपये में कनवर्ट करके खुश होते हैं, महंगाई और टैक्स का गणित नहीं समझते. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि विदेश जाना सिर्फ पैसे के लिए नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल, सुरक्षा और करियर में एक बड़े ब्रांड का नाम जोड़ने के लिए भी होता है.
चलते-चलते एक और कड़वी सच्चाई जान लीजिए. जर्मनी में अब सिर्फ अंग्रेजी के भरोसे नौकरी मिलना नामुमकिन सा हो गया है. अगर वहां पैर जमाने हैं, तो कड़क जर्मन भाषा (C1 लेवल) आनी ही चाहिए.
तो जनाब, अगली बार जब कोई जर्मनी के पैकेज की बात करे, तो इस कड़वे सच को जरूर याद रखिएगा. फैसला सोच-समझकर लें, ताकि बाद में पछताना न पड़े.
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